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NEET छात्रा कांड की कोर्ट में सुनवाई: पीड़िता के वकील बोले-मामले को रफा-दफा कर रही है CBI, अदालत ने जताई नाराजगी, पटना SSP तलब

पटना सिविल कोर्ट में नीट छात्रा कांड की सुनवाई के दौरान सीबीआई पर गंभीर सवाल उठे। पीड़िता के वकील ने जांच को लीपा-पोती करार दिया, जबकि अदालत ने नाराजगी जताते हुए सीबीआई अधिकारी से लिखित जवाब मांगा और पटना SSP समेत कई अधिकारियों को तलब किया।

28-Feb-2026 05:24 PM

By First Bihar

PATNA: पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा कांड में आज पटना सिविल कोर्ट ने सीबीआई की जमकर क्लास लगाई. कोर्ट ने आज तीन घंटे से ज्यादा समय तक इस मामले की सुनवाई की. पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि सीबीआई पूरे मामले की लीपा-पोती करना चाहती है. उसने नाबालिग लड़की का मामला होने के बावजूद पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया है. सीबीआई द्वारा दर्ज किये गये केस में कई गड़बड़ी है.


कोर्ट ने इस केस की जांच कर रहे सीबीआई के अधिकारी को लिखित जवाब देने का निर्देश किया है. वहीं, पटना के एसएसपी, बेऊर जेल के सुपरीटेंडेंट समेत दूसरे अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया गया है. कोर्ट इस मामले पर फिर से 2 मार्च को सुनवाई करेगा.  उधर, इस मामले में जेल भेजे गये हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को जमानत मिलने की संभावना है. पटना कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मनीष रंजन को न्यायिक हिरासत में रखने का कोई मतलब नहीं है. अगर उसे जमानत दे दी जाये तो सीबीआई को कोई ऐतराज नहीं है. यानि सीबीआई को अपनी जांच में मनीष रंजन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है. 


बता दें कि बिहार पुलिस ने नीट छात्रा कांड में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बाद में इस मामले की जांच सीबीआई के हाथों में आ गई. जेल में बंद मनीष रंजन ने अपनी जमानत के लिए पटना कोर्ट में याचिका दायर की है. उस याचिका पर कोर्ट में आज दूसरे दिन सुनवाई हुई. 


कोर्ट में तीन घंटे तक सुनवाई, सीबीआई पर गंभीर आरोप

मनीष रंजन की जमानत औऱ नीट छात्रा से जुड़े मामले पर पटना कोर्ट में आज तीन घंटे से ज्यादा समय तक सुनवाई हुई. मृत छात्रा के परिजनों की ओर से हाईकोर्ट में पेश हुए वकील एस.के. पांडेय ने सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाया है. एसके पांडेय ने कहा कि मृतका की उम्र 17 साल 4 महीने थी. उसी जन्मतिथि स्कूल सर्टिफिकेट से लेकर दूसरे तमाम कागजातों में दर्ज है. लेकिन सीबीआई ने नाबालिगों के लिए बने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं किया है. वकील ने कहा कि सीबीआई के आईओ कानून औऱ संविधान को नकार कर काम कर रहे हैं.  


कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में आज सीबीआई औऱ बिहार पुलिस दोनों के अनुसंधानकर्ताओं को पेश होने को कहा था. दोनों आज कोर्ट में मौजूद थे. कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि वह 15 दिनों से इस मामले की जांच कर रही है, उसे अब तक क्या हासिल हुआ है. सीबीआई ने पॉक्सो की धारा क्यों नहीं लगाई. उसने सिर्फ हत्या के प्रयास का केस क्यों दर्ज किया है. इन तमाम बिंदुओं पर सीबीआई से लिखित जवाब मांगा गया है..


पटना पुलिस की पोल खुली

इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने केस चित्रगुप्त नगर की तत्कालीन थानेदार और शुरुआत में IO रही रौशनी कुमारी से कई सवाल पूछे थे। उनसे पूछा गया कि आपने कितनी तारीख तक केस की जांच की? मनीष रंजन पर क्या आरोप है? इसके खिलाफ क्या सबूत मिले? आपने अपनी जांच में क्या-क्या जब्त किया? सबूतों को 24 घंटे में कोर्ट में क्यों नहीं पेश किया?


तत्कालीन थानेदार रौशनी ने छात्रा का मोबाइल और हॉस्टल का DVR जब्त किया था. कोर्ट ने पूछा कि इसे आपने अपने पास क्यों रखा? FSL जांच क्यों नहीं कराई? कोर्ट से इसकी अनुमति क्यों नहीं ली? अपना पक्ष रखते हुए रौशनी ने कहा कि उन्होंने सारी चीजें SIT को 17 जनवरी को सौंप दिया था. उसी समय कोर्ट में मौजूद SIT की अनुसंधानकर्ता ने कहा कि नहीं, हमें 24 जनवरी को मिला था.


कोर्ट में दोनों के बयान मेल नहीं खाए. पीड़ित पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इन लोगों ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ किया है. कोर्ट ने SIT की ओर से जांच कर रही सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी से भी सवाल किया गया है। मनीष रंजन कब-कहां गये थे? वे बिहार से बाहर कब गए? उन्हें कब पकड़ा? उनका स्टेटमेंट क्या था?


सवालों का जवाब देते हुए कोर्ट को डॉ. अन्नू ने बताया कि CDR खंगाला गया है. उससे इनके लोकेशन को मिलाया गया है. पीडित पक्ष के वकील ने कहा कि इस मामले में रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है. हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उससे पूछताछ नहीं की गयी. उसे सीधे जेल भेज दिया गया. इससे जाहिर होता है कि बिहार पुलिस सच्चाई का पता लगाना चाहती ही नहीं थी.

FIRST BIHAR के लिए पटना से सूरज की रिपोर्ट