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11-Jan-2026 01:28 PM
By First Bihar
Bihar education news : बिहार में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सिस्टम की खामियों के साथ-साथ एक शिक्षक और उसके परिवार की आर्थिक पीड़ा को भी उजागर कर दिया है। मामला औरंगाबाद जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के नबीनगर गांव निवासी शिक्षक ब्रज किशोर चौधरी से जुड़ा है, जिन्हें जेल में रहते हुए 22 महीने तक नियमित वेतन मिलता रहा, लेकिन जब वे पूरी तरह दोषमुक्त होकर बाहर आए और दोबारा स्कूल में योगदान दिया, तो उनका वेतन रोक दिया गया।
ब्रज किशोर चौधरी एक हत्या के मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे। इसी दौरान उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-1 पास कर ली। हैरानी की बात यह है कि जेल प्रशासन की अनुमति लेकर 30 नवंबर 2023 को उन्हें पुलिस अभिरक्षा में हाईस्कूल तिउरी में शिक्षक पद पर योगदान भी करा दिया गया। कुछ समय बाद वे फिर जेल भेजे गए, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया। नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में वेतन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, लेकिन यहां सिस्टम की बड़ी चूक सामने आई।
निलंबन के बावजूद ब्रज किशोर चौधरी के खाते में हर महीने वेतन जाता रहा। यह सिलसिला पूरे 22 महीने तक चला, और किसी भी स्तर पर इसे रोकने या जांचने की कोशिश नहीं की गई। इस दौरान न तो स्कूल स्तर पर और न ही प्रखंड या जिला कार्यालय में किसी ने इस विसंगति पर ध्यान दिया। बाद में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर 25 जुलाई 2025 को ब्रज किशोर चौधरी को मामले में पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया गया।
दोषमुक्त होने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर 2025 को पत्रांक–5763 जारी कर उनका निलंबन समाप्त कर दिया। निलंबन हटते ही शिक्षक ने हाईस्कूल तिउरी में नियमित रूप से योगदान किया और तब से लगातार बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। लेकिन यहीं से उनकी परेशानी शुरू हो गई। नवंबर और दिसंबर 2025 का वेतन आज तक उन्हें नहीं मिला है।
शिक्षक का कहना है कि निलंबन अवधि में वेतन भुगतान विभाग की गलती से हुआ। अब विभाग उनसे पूरी राशि एकमुश्त वापस करने का दबाव बना रहा है। ब्रज किशोर चौधरी ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे के कारण परिवार पर भारी बोझ पड़ा। अब एक साथ इतनी बड़ी रकम लौटाना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने किश्तों में राशि लौटाने की अनुमति मांगी है, लेकिन इस पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।
स्थिति यह है कि वे रोजाना स्कूल की छुट्टी के बाद शिक्षा कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है, लेकिन वेतन भुगतान या समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
मामले पर सफाई देते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीओ) आनंद शंकर ने कहा कि तिउरी हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक ने निलंबन की सूचना समय पर प्रखंड कार्यालय को भेज दी थी। इसके बावजूद प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित एकाउंटेंट राजन कुमार की लापरवाही के कारण जेल में रहते हुए भी वेतन भुगतान होता रहा। जांच में आरोप सही पाए गए हैं और संबंधित एकाउंटेंट पर कार्रवाई की अनुशंसा कर दी गई है।
हालांकि सवाल यह उठता है कि एक कर्मचारी की गलती का खामियाजा एक शिक्षक और उसके परिवार को क्यों भुगतना पड़ रहा है। यह मामला न सिर्फ शिक्षा विभाग की आंतरिक व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सिस्टम की गलती का बोझ अक्सर सबसे कमजोर कड़ी पर डाल दिया जाता है। अब देखना यह है कि विभाग इस पूरे मामले में शिक्षक को राहत देता है या फिर यह लापरवाही की कहानी यूं ही फाइलों में दबकर रह जाती है।