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Bihar News: अब सीएम नीतीश कुमार के नाम पर फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र बनाने की साजिश, पुलिस ने FIR दर्ज कर कार्रवाई की शुरू

Bihar News: बिहार में फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने के मामलों में तेजी आई है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम और फोटो का भी दुरुपयोग हुआ। मुजफ्फरपुर में इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

04-Aug-2025 09:56 AM

By First Bihar

Bihar News: बिहार में फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने के मामलों की बाढ़ सी आ गई है। इस बार जालसाजों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी नहीं बख्शा। मुजफ्फरपुर जिले के सरैया थाने में एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिसने सीएम के नाम और फोटो के साथ फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश की। पुलिस इस पूरे मामले को एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र मान रही है।


दरअसल, राजस्व अधिकारी अभिषेक सिंह ने 29 जुलाई को ऑनलाइन आवेदनों की जांच के दौरान इस फर्जीवाड़े को पकड़ा। उन्होंने देखा कि एक आवेदन ‘नीतीश कुमारी’ नाम से किया गया था, जिसमें पिता का नाम लखन पासवान और माता का नाम लकिया देवी दर्ज था। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आवेदन में लगी तस्वीर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह प्रयास सीएम की छवि धूमिल करने और प्रशासनिक प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने के उद्देश्य से किया गया था।


इस साजिश के खिलाफ सरैया अंचल के राजस्व अधिकारी ने सरैया थाने में FIR दर्ज कराई है। मामले की जांच की जिम्मेदारी एसआई अनिल कुमार को सौंपी गई है। थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया ने पुष्टि की कि केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


वहीं,  इससे पहले भी राज्य में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां सरकारी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश की गई। हाल ही में पटना में एक कुत्ते के नाम से आवासीय प्रमाणपत्र जारी करने का मामला वायरल हुआ था, जिसने पूरे देश में बिहार की प्रशासनिक प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया था।


इसी तरह मोतिहारी में फिल्म अभिनेत्री मोनालिसा की तस्वीर लगाकर ट्रैक्टर खरीदने के लिए दस्तावेज बनाए गए थे, जबकि नवादा में ‘डोगेश बाबू’ नामक फर्जी पहचान से आवेदन दाखिल किया गया था। इन सभी मामलों में प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की है। पटना में तो एक कार्यपालक सहायक को जेल भी भेजा गया। मुख्यमंत्री के नाम पर की गई यह हालिया साजिश सरकार की ई-गवर्नेंस प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सवाल यह उठता है कि जब सीएम तक के नाम पर फर्जीवाड़ा हो सकता है, तो आम जनता कितनी सुरक्षित है?