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Bihar cyber fraud : एक ही चेहरे से जारी हुए दर्जनों सिम कार्ड, इस तरह से खुला बड़ा फर्जीवाड़ा; अब मचा हडकंप

बिहार में साइबर ठगी के लिए एक ही चेहरे से अलग-अलग नाम पर दर्जनों सिम जारी करने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। AI तकनीक से दूरसंचार विभाग ने किया खुलासा।

Bihar cyber fraud : एक ही चेहरे से जारी हुए दर्जनों सिम कार्ड, इस तरह से खुला बड़ा फर्जीवाड़ा; अब मचा हडकंप
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

BIHAR NEWS : बिहार में साइबर ठगी के लिए सिम कार्ड के इस्तेमाल का एक बेहद चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। अब तक फर्जी फोटो और बदली हुई पहचान के जरिए सिम लेने के मामले सामने आते थे, लेकिन अब एक ही व्यक्ति के चेहरे का इस्तेमाल कर अलग-अलग नाम और पते पर दर्जनों सिम कार्ड जारी करने का खेल पकड़ा गया है। इस खुलासे के बाद दूरसंचार विभाग ने राज्यभर में ऐसे जालसाज सिम विक्रेताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया जा रहा है।


दूरसंचार विभाग की जांच में यह मामला तब सामने आया जब विभाग ने अत्याधुनिक एआई आधारित तकनीक ASTR (Artificial Intelligence and Facial Recognition) का इस्तेमाल किया। इस एडवांस टूल की मदद से सिम कार्ड खरीदने वालों के चेहरे की पहचान और मिलान किया गया। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कई सिम विक्रेताओं ने एक ही व्यक्ति के चेहरे का इस्तेमाल कर अलग-अलग नाम और पते पर 10 से लेकर 30 तक सिम कार्ड जारी कर दिए।


दरअसल, यह एआई सिस्टम किसी भी फोटो की बारीकी से जांच करता है और यह तुरंत पता लगा लेता है कि फोटो में छेड़छाड़ की गई है या एक ही व्यक्ति की तस्वीर को बार-बार अलग-अलग पहचान के साथ इस्तेमाल किया गया है। इसी तकनीक की मदद से विभाग ने बड़ी संख्या में ऐसे सिम कार्डों की पहचान की, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के नेटवर्क में किया जा रहा था।


जांच में यह भी सामने आया है कि इस बार ठगों ने केवल अपनी पहचान छुपाने के लिए फोटो नहीं बदली, बल्कि कुछ सिम विक्रेताओं की मिलीभगत से फर्जी पहचान पत्र तैयार किए गए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गलत केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी कर थोक में सिम कार्ड जारी किए गए। बाद में इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जाने लगा।


दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विभाग के पास मौजूद डिजिटल डेटा से अब यह साफ हो गया है कि किस सिम विक्रेता ने कब, कहां और किस पहचान के आधार पर सिम कार्ड जारी किए। इससे जांच एजेंसियों को दोषियों तक पहुंचने में काफी मदद मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।


बताया जा रहा है कि वर्तमान में बिहार में लगभग सवा लाख (करीब 1.25 लाख) सिम विक्रेता सक्रिय हैं। अब इन सभी विक्रेताओं की गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है। जिन विक्रेताओं पर फर्जी केवाईसी या नियमों के उल्लंघन का आरोप साबित होगा, उनके लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।


इसी सिलसिले में दूरसंचार विभाग (भारत सरकार) के महानिदेशक आनंद खरे ने बुधवार को बिहार सर्किल के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों और फर्जी सिम कार्डों के नेटवर्क पर विस्तार से चर्चा की गई। महानिदेशक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गलत तरीके से सिम बेचने वाले वेंडर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए।


उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस मामले में किसी दूरसंचार कंपनी के कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साइबर अपराधों को रोकने के लिए सिम जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी है।


बैठक के बाद महानिदेशक आनंद खरे ने पटना के हार्डिंग रोड स्थित उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां दूरसंचार विभाग, बिहार सर्किल का नया कार्यालय भवन बनाया जाना प्रस्तावित है। अधिकारियों ने उन्हें भवन निर्माण से जुड़ी योजनाओं और प्रस्तावित सुविधाओं की जानकारी दी। बताया गया कि यह नया कार्यालय अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे विभागीय कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।


दूरसंचार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से साइबर अपराधियों के नेटवर्क को पहचानने में काफी मदद मिल रही है। आने वाले समय में एआई और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए फर्जी सिम कार्डों के इस्तेमाल पर और सख्ती से रोक लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि साइबर ठगी के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।