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12-Mar-2026 10:52 AM
By First Bihar
DELHI: रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले (Land for Job Scam) से जुड़े मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की अर्जी पर सुनवाई करते हुए ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से जवाब मांगा है। लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
सीबीआई को नोटिस
बुधवार को लालू यादव की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया। अदालत ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अपना हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख तय की है।
भोला यादव की याचिका पर भी सुनवाई
इस मामले में लालू यादव के करीबी सहयोगी भोला यादव की ओर से दाखिल याचिका पर भी हाई कोर्ट सुनवाई करेगा। उनकी याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कुछ आरोपितों को माफी देकर उन्हें सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी गई थी।
कपिल सिब्बल ने दी दलील
सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अदालत में पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला बनता ही नहीं है। सिब्बल ने कहा कि रेलवे में भर्ती की प्रक्रिया में रेल मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं होती, इसलिए लालू यादव को इस मामले में जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग
लालू प्रसाद यादव ने अपनी याचिका में स्थित विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें जनवरी महीने में उनके और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
परिवार के कई सदस्य आरोपित
ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, बेटियां मीसा भारतीऔर हेमा यादव समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ पहली नजर में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला बनता है।
2004 से 2009 के बीच का है मामला
यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का बताया जाता है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस दौरान रेलवे में भर्ती के बदले लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर जमीनें खरीदी गईं। आरोप यह भी है कि इन जमीनों का भुगतान नकद किया गया और इसके बदले संबंधित लोगों को रेलवे में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाई गई। फिलहाल हाई कोर्ट ने सीबीआई से जवाब तलब करते हुए मामले की सुनवाई 17 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। आगे की सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।