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Bihar News: स्ट्रेचर पर बोरी, पैदल चला मरीज; बिहार के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर वायरल

Bihar News: खगड़िया सदर अस्पताल में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां मरीज के बदले स्ट्रेचर पर बोरियां ढोयी जा रही है. तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सवाल उठ रहे हैं.

12-Aug-2025 12:13 PM

By First Bihar

Bihar News: स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की एक शर्मनाक तस्वीर बिहार के खगड़िया सदर अस्पताल से सामने आई है, जहां सोमवार को इमरजेंसी वार्ड के बाहर एक मरीज स्ट्रेचर का इंतजार करता रहा, लेकिन अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने उसकी तकलीफ की अनदेखी करते हुए स्ट्रेचर पर बोरियां लादकर इधर-उधर ले जाना ज्यादा जरूरी समझा।


यह घटना सोमवार को हुई, जब एक मरीज एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा। मरीज की हालत गंभीर थी और उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता थी। लेकिन इमरजेंसी वार्ड के बाहर न तो कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद था, न ही किसी ने स्ट्रेचर लाकर दिया। मजबूर होकर परिजनों ने मरीज को एंबुलेंस से उतारा और पैदल ही सहारा देकर इमरजेंसी वार्ड तक ले गए।


इस दौरान अस्पताल कर्मी स्ट्रेचर का इस्तेमाल अस्पताल के अंदर बोरियां पहुँचाने के लिए कर रहे थे। बताया गया है कि इन बोरियों में प्रसव वार्ड के लिए मेडिकल सामग्री रखी गई थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इमरजेंसी मरीज से ज़्यादा जरूरी थी वह सामग्री? इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब मरीज को स्ट्रेचर की सबसे अधिक ज़रूरत थी, तब अस्पताल स्टाफ बेपरवाह नज़र आ रहा था।


जब इस मामले में अस्पताल प्रबंधक प्रणव कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी और जांच कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब तक किसी स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। क्या एक सरकारी अस्पताल में इमरजेंसी मरीज की कोई अहमियत नहीं रही? क्या मेडिकल सामग्री ढोने के लिए स्ट्रेचर का इस्तेमाल करना प्राथमिकता बन गई है?


इस घटना ने एक बार फिर बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह पहली बार नहीं है जब खगड़िया सदर अस्पताल में ऐसी लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले भी कई मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके हैं या अपमानजनक परिस्थितियों का सामना कर चुके हैं। सवाल उठ रहा है कि प्रशासन आखिर कब तक ऐसी लापरवाही पर आंखें मूंदे रहेगा?

रिपोर्ट- अनिश कुमार, खगड़िया