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16-Jan-2026 10:35 AM
By First Bihar
Jamui school viral video : बिहार सरकार एक ओर जहां शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों की बहाली और विद्यालयों के रखरखाव, रंग-रोगन व मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ताजा मामला जमुई जिले के सोनो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय हथिया पत्थर से सामने आया है, जहां स्कूल भवन की छत को ही खलिहान में तब्दील कर दिया गया है। विद्यालय की छत पर धान के कई पुंज रखे गए हैं, जिससे न केवल भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका है बल्कि नीचे पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जान भी खतरे में पड़ गई है।
बताया जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालय हथिया पत्थर का भवन बाहर से देखने में भले ही सुंदर और आकर्षक लगता हो, लेकिन अंदर की स्थिति बेहद बदहाल है। स्कूल परिसर और कमरों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय भवन का उपयोग शिक्षा के बजाय घरेलू कार्यों के लिए किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल की छत को किसानों के खलिहान की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और उस पर भारी मात्रा में धान के पुंज रखे गए हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की छत इस तरह के भारी भार के लिए नहीं बनाई जाती। लंबे समय तक धान और पुआल रखे रहने से छत कमजोर हो सकती है। खासकर बारिश के दिनों में पुआल के कारण छत पर पानी जमा हो जाता है, जिससे सीलन और दरारें पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में कभी भी छत गिरने जैसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसी छत के नीचे बच्चे रोजाना पढ़ाई करते हैं, जिससे उनकी जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय के जिम्मेदार शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर आंख मूंदे बैठे हैं। यदि समय रहते स्कूल भवन की सफाई कर छत से धान के पुंज नहीं हटाए गए, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की पूरी संभावना है। ऐसे किसी भी हादसे की जिम्मेदारी सीधे तौर पर शिक्षा विभाग पर होगी।
इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल की छत पर धान के कई पुंज रखे गए हैं और नीचे बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद भी अब तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। इससे यह साफ जाहिर होता है कि अधिकारी इस गंभीर मामले को लेकर कितने संवेदनशील हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और स्कूल भवन को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाया जाए।
कुल मिलाकर, जमुई के इस सरकारी स्कूल की हालत शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और विभागीय लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।