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30-Sep-2025 08:24 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार की राजनीति इन दिनों काफी सरगर्म है। विधानसभा चुनाव का एलान कुछ ही दिनों में होने वाला है और उससे पहले सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। इसी बीच एनडीए के सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। मांझी ने कहा है कि उनकी दिली इच्छा रही है कि वह गया जिले की अतरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ें। हालांकि अब तक उन्हें यह मौका नहीं मिला, क्योंकि यह सीट जेडीयू के खाते में जाती रही है।
मांझी की दिली इच्छा – अतरी से चुनाव लड़ना
जीतन राम मांझी, जिनकी उम्र अब 85 वर्ष हो चुकी है, का कहना है कि वह लंबे समय से अतरी से चुनाव लड़ना चाहते थे। गया के एक पूजा पंडाल में जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह अतरी से चुनाव मैदान में उतरने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा – “हमारी दिल से यह इच्छा रही है कि हम अतरी से चुनाव लड़ें, लेकिन अब तक मौका नहीं मिला। अगर हम खुद यहां से नहीं लड़ पाए तो अब चाहेंगे कि हमारी पार्टी का कोई उम्मीदवार यहां से उतरे।” यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सहयोगी पार्टी की इस मांग को मानेंगे और जेडीयू की परंपरागत सीट को छोड़ने को तैयार होंगे?
जेडीयू का गढ़ रही है अतरी सीट
अतरी विधानसभा सीट पर अब तक जेडीयू का दावा रहा है। पिछली बार 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने यहां से मनोरमा देवी को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, वह चुनाव जीत नहीं सकीं और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम के मुताबिक, राजद के उम्मीदवार अजय यादव को कुल 62,658 वोट (37.55%) मिले, जबकि जेडीयू की मनोरमा देवी को 54,727 वोट (32.8%) प्राप्त हुए। इस तरह अजय यादव ने 7,931 वोटों से जीत दर्ज की। लेकिन,इस हार के बाद से ही जेडीयू इस सीट पर कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में मांझी का यहां से चुनाव लड़ने का इरादा जेडीयू के लिए भी राहत बन सकता है, क्योंकि मांझी का इस इलाके में खासा प्रभाव माना जाता है।
मांझी की नाराज़गी और अफसोस
मांझी का बयान केवल उनकी इच्छा ही नहीं, बल्कि कहीं न कहीं उनकी नाराज़गी भी जाहिर करता है। उन्होंने कहा कि उन्हें अफसोस है कि 85 साल की उम्र में भी वह अतरी से चुनाव नहीं लड़ पाए। यह बयान नीतीश कुमार और जेडीयू पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने जैसा है। मांझी ने साफ कहा है कि अगर वह खुद उम्मीदवार नहीं बने तो कम से कम उनकी पार्टी हम का कोई उम्मीदवार इस सीट से जरूर उतरेगा।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। जेडीयू और भाजपा के साथ हम और अन्य सहयोगी दल भी अपने-अपने हिस्से की मजबूत सीटों की मांग कर रहे हैं। मांझी का यह बयान सीधे तौर पर जेडीयू को चुनौती है, क्योंकि अब यह तय करना नीतीश कुमार के लिए आसान नहीं होगा कि वह मांझी की बात मानें या सीट पर जेडीयू का दावा बरकरार रखें।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार व्यावहारिक नेता हैं और गठबंधन को बचाने के लिए अक्सर समझौते कर लेते हैं। अगर उन्हें लगेगा कि अतरी सीट पर मांझी को उतारना गठबंधन के लिए फायदेमंद होगा तो वह सीट छोड़ भी सकते हैं। हालांकि, जेडीयू कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति बन सकती है, क्योंकि यह सीट वर्षों से पार्टी के खाते में रही है।
बहरहाल, बिहार की राजनीति हमेशा से जटिल समीकरणों पर टिकी रही है। जीतन राम मांझी का अतरी से चुनाव लड़ने का ऐलान इस बार के चुनाव में नया मोड़ ला सकता है। 85 साल की उम्र में भी मांझी का यह उत्साह और अपनी राजनीतिक इच्छा को पूरा करने का जज़्बा उनकी सक्रियता को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि नीतीश कुमार उनकी इस मांग को मानते हैं या नहीं।