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Bihar Voter List: बिहार में लाखों लापता वोटर्स और हजारों अवैध प्रवासी, चुनाव आयोग के खुलासे के बाद मचा हड़कंप

Bihar Voter List: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 41 लाख मतदाता 'लापता', 11,000 पर अवैध प्रवासी होने की आशंका। चुनाव आयोग ने फर्जी मतदाता पहचान पत्रों को लेकर किया बड़ा खुलासा।

21-Jul-2025 07:47 AM

By First Bihar

Bihar Voter List: बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान चुनाव आयोग ने बड़ा खुलासा किया है। 19 जुलाई को जारी ताजा अपडेट के अनुसार बिहार के 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 41.6 लाख (5.3%) मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। इनमें से करीब 11,000 मतदाताओं पर अवैध प्रवासी होने की आशंका जताई गई है, जिन्होंने संभवतः फर्जी तरीके से मतदाता पहचान पत्र हासिल किए हैं। बूथ लेवल अधिकारियों ने इन मतदाताओं के पते पर तीन बार दौरा किया, लेकिन न तो वे मिले और न ही पड़ोसियों को उनके बारे में कोई जानकारी थी। कुछ मामलों में दर्ज पते पर कोई घर या आवास ही नहीं पाया गया।


चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि इन 11,000 मतदाताओं के अवैध प्रवासी संभवतः बांग्लादेशी या रोहिंग्या होने की आशंका है जो पड़ोसी राज्यों में रहते हुए बिहार में मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करने में सफल रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि इनके नाम 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे। इसके लिए 1 अगस्त के बाद गहन जांच की जाएगी।


SIR प्रक्रिया 25 जून से शुरू हुई, जिसमें 77,895 BLOs घर-घर जाकर गणना फॉर्म एकत्र कर रहे हैं। अब तक 96% मतदाताओं (लगभग 7.56 करोड़) ने फॉर्म जमा किए हैं। शेष 5.3% (41.6 लाख) मतदाता अपने पते पर नहीं मिले, जिनमें 12.5 लाख मृतक, 17.5 लाख स्थायी रूप से बिहार से बाहर चले गए और 5.5 लाख दोहरे पंजीकरण वाले हैं।


SIR को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों को मतदाता सूची से हटाने की साजिश है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में कहा गया कि बिहार में गरीबी और बाढ़ के कारण कई लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज नहीं हैं। कोर्ट ने 10 जुलाई को सुनवाई के दौरान आयोग से आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को भी सत्यापन के लिए स्वीकार करने को कहा। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।


आयोग ने SIR को 2003 के बाद पहला व्यापक पुनरीक्षण बताया, जिसका उद्देश्य मृतकों, डुप्लिकेट और अवैध मतदाताओं को हटाकर सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है। आयोग ने दावा किया कि 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को केवल फॉर्म भरना है, जबकि 2.93 करोड़ नए मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने होंगे।


RJD नेता तेजस्वी यादव ने SIR को “NRC का बैकडोर” करार दिया, जबकि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूछा कि अगर अवैध प्रवासी थे तो 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें वोट क्यों देने दिया गया। दूसरी ओर BJP ने SIR का समर्थन करते हुए विपक्ष पर फर्जी मतदाताओं को बचाने का आरोप लगाया।


मतदाता 25 जुलाई तक गणना फॉर्म जमा कर सकते हैं। प्रारूप मतदाता सूची 1 अगस्त को प्रकाशित होगी और दावे-आपत्तियां 1 सितंबर तक स्वीकार होंगी। अंतिम सूची 30 सितंबर को जारी होगी। बिहार में यह प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अवैध प्रवासियों की आशंका और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की चिंता ने इसे राजनीतिक विवाद का केंद्र बना दिया है।