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14-Feb-2026 07:22 AM
By FIRST BIHAR
Bihar News: बिहार राज्य उच्च जाति आयोग (सवर्ण आयोग) ने राज्य की उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सभी पात्र गरीबों को शत-प्रतिशत प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश जिलाधिकारियों को दिया है। साथ ही, प्रमाण पत्र निर्गत करने में आ रही कठिनाइयों के समाधान के लिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। आयोग ने उच्च वर्ग के गरीब भूमिहीन परिवारों को घर निर्माण के लिए पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की सिफारिश राज्य सरकार से की है।
शुक्रवार को नेहरू मार्ग (बेली रोड) स्थित कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने यह निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान सामने आया कि EWS नियमावली में कुछ त्रुटियां हैं, जिनमें सुधार के लिए सामान्य प्रशासन विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से समन्वय की आवश्यकता है।
आयोग ने सभी जिलों से अब तक जारी EWS प्रमाण पत्रों की संख्या, अस्वीकृत आवेदनों और लंबित मामलों का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद, सदस्य राजकुमार सिंह, जयकृष्ण झा और दयानंद राय उपस्थित थे। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि पिछले सात महीनों में किए गए कार्यों की समीक्षा की गई है। सभी नौ प्रमंडलों से प्राप्त सुझावों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
आयोग ने राज्य सरकार से मांग की है कि उच्च जातियों के गरीब भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल बासगीत भूमि उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग और छात्रावास की व्यवस्था की जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा बढ़ाकर पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 40 वर्ष और महिला अभ्यर्थियों के लिए 45 वर्ष करने का अनुरोध भी किया गया है।
आयोग के अनुसार, सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आबादी 25.09 प्रतिशत है। इस वर्ग में 10 हजार रुपये मासिक आय वाले परिवारों की हिस्सेदारी 49.07 प्रतिशत बताई गई है। आयोग का मानना है कि इस वर्ग को आवास, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सरकारी सहायता की आवश्यकता है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग के बीच केंद्र सरकार ने अपर कास्ट के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है, जिसे EWS के नाम से जाना जाता है। हाल के दिनों में EWS प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों की शिकायतें मिल रही थीं। इसी को देखते हुए सवर्ण आयोग ने जिला प्रशासन को प्रक्रिया सरल और प्रभावी बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही, गरीब भूमिहीन परिवारों को आवास के लिए पांच डिसमिल जमीन देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।