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जेल अधीक्षक पर 'सरकारी कृपा' ! DSP के 80 Cr कमाई की चर्चा...2025 में धनकुबेर 'काराधीक्षक' के भ्रष्टाचार ने भी बटोरी थी सुर्खियां, रिजल्ट- नीतीश सरकार ने 'करप्शन' से किया समझौता

डीएसपी गौतम कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई की चर्चा है। दूसरी ओर 2025 में डीए केस के आरोपी रहे बेउर जेल के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार को 2026 में बेगूसराय जेल अधीक्षक बनाकर पोस्टिंग दे दी गई, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

01-Apr-2026 01:38 PM

By Viveka Nand

Bihar News: बिहार के एक भ्रष्ट डीएसपी के ठिकानों से कुबेर का खजाना मिला है. शुरूआती जांच में 80 करोड़ की संपत्ति के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है. 2026 में भ्रष्टाचारियों का खिलाफ यह सबसे ठोस कार्रवाई मानी जा रही है. ठीक एक साल पहले 2025 में भी आर्थिक अपराध इकाई ने ऐसे ही एक बड़े धनकुबेर जेल अधीक्षक  के खिलाफ बड़ा प्रहार किया था. जेल अधीक्षक व पत्नी, रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी में अकूत संपत्ति के खुलासे के दावे किए गए थे. लेकिन सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपी जेल अधीक्षक पर ऐसी कृपा बरसाई जिसे देखकर जांच एजेंसी भी भौंचक है. समझ में नहीं आ रहा, आखिर सरकार की मंशा क्या है...? आखिर भ्रष्टाचार के आरोपी अफसर जिसके खिलाफ 2025 में बड़ी कार्रवाई की गई, उसे फील्ड पोस्टिंग देकर फिर जेल अधीक्षक क्यों बनाया गया ? यह सवाल तैर रहा है. हालांकि इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अफसरों के पास भी नहीं है. 

डीएसपी गौतम से पहले जेल अधीक्षक विधु के भ्रष्टाचार की थी चर्चा 

दरोगा से प्रमोट होकर डीएसपी बने गौतम कुमार ने सेवा काल में 80 करोड़ की संपत्ति बनाई है. यह संपत्ति पत्नी-सास और महिला मित्र के नाम पर अर्जित की है. जांच एजेंसी के खुलासे से हड़कंप मच गया है. अब आर्थिक अपराध इकाई लगभग 80 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने वाले डीएसपी से अब पूछताछ करेगी. 31 मार्च की छापेमारी के बाद से डीएसपी गौतम कुमार बिहार भर में चर्चा में हैं. आखिर इतनी संपत्ति कैसे बनाई? इसी तरह की चर्चा 2025 में भी हुई थी, जब आर्थिक अपराध इकाई ने ही बेउर जेल के अधीक्षक विधु कुमार के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. डीए केस दर्ज कर ईओयू ने जेल अधीक्षक विधु कुमार व अन्य के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. तब दावा किया गया था कि करोड़ों की अवैध संपत्ति व लेन-देन का पता चला है. साल भर होते-होते सरकार ने भ्रष्टाचार के उक्त आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार पर जबरदस्त कृपा बरसाई है. ऐसी कृपा जिसे देख-सुनकर आर्थिक अपराध इकाई भी हतप्रभ है.

 साल भर में ही विधु कुमार को बेगूसराय का जेल अधीक्षक बना दिया 

 आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना के बेउर आदर्श केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार के खिलाफ 3 जनवरी 2025 को डीए केस सं- 1/25 दर्ज किया था. इसके बाद जेल अधीक्षक के पटना से लेकर मोतिहारी तक कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. तब यह मामला काफी चर्चा में रहा. कई दिनों तक यह खबर सुर्खियों बटोरी. सरकार की भद्द मिटने के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड किया था. कुछ महीनों तक सस्पेंड रखने के बाद सरकार ने चुपके से भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी विधु कुमार को निलंबन मुक्त किया और आरोपों को दरकिनार कर फील्ड में पोस्टिंग दे दी. उक्त आरोपी अधिकारी को बेगूसराय का जेल अधीक्षक बनाया गया है. गृह विभाग के 10 फऱवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार, करप्शन केस के बड़े आरोपी को बेगूसराय का जेल अधीक्षक के पद पर पोस्टिंग दी गई है. इस तरह से फील्ड में जगह देकर सरकार ने करप्शन के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का खुद ही माखौल उड़ा दिया. 

विधु कुमार के खिलाफ ईओयू ने दर्ज किया था डीए केस  

ईओयू के केस आरोप लगाया गया था कि विधु कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत अवैध संपत्ति अर्जित की जो वैध स्रोत से हुई आय से 146 प्रतिशत अधिक है। बेउर केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक व वर्तमान में बेगूसराय के अधीक्षक विधु कुमार पर आरोप है कि ये जेल में बंद कैदियों का शोषण और मानसिक उत्पीडऩ कर उनसे पैसों की उगाही करते थे। उनकी काली कमाई में परिवार के कई सदस्यों के साथ ही विश्वसनीय कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार भी शामिल थे। ईओयू की छापेमारी के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड कर दिया था. निलंबन अवधि में विधु कुमार का मुख्यालय केंद्रीय कारा, बक्सर निर्धारित किया गया था. 

विधु कुमार के कई करीबी के ठिकानों पर भी हुई थी छापेमारी 

विधु कुमार पर आरोप थे कि इन्होंने अपनी अवैध कमाई से 54 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात एवं बर्तन खरीदे. चार लाख रुपये चांदी के बर्तन खरीदने में भी काली कमाई का इस्तेमाल किया था। इनके यहां छापामारी के दौरान जमीन खरीद की छह डीड भी बरामद की गई थी. विधु कुमार के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने पटना के सरकारी आवास के साथ ही इनके बेउर स्थित कार्यालय कक्ष, सगुना स्थित घर, बिशनपुरा बिहटा स्थित घर, आरा गार्डन रेसीडेंसी स्थित किराये के फ्लैट के साथ ही कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार के घर, मोतिहारी में एक करीबी के घर और इनके सीए के कार्यालय में ईओयू की टीमों ने एक साथ छापा मारा था। जिसमें यह जानकारी सामने आई कि विधु कुमार ने वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करते हुए पटना, मोतिहारी एवं अन्य स्थानों पर मां, पिता और पत्नी एवं अपने नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदी थी।

ईओयू ने मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से काले धन को सफेद बनाने के लगाए थे आरोप 

ये मनी लॉन्डरिंग कर यह अपने काले धन को सफेद भी बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने मां और पत्नी के नाम पर कई शेल कंपनियां भी बनाई थी। मनी लॉन्डरिंग के इस काम में नजदीकी मित्र और इनके चार्टर्ड एकाउंटेंट की अहम भूमिका पाई गई। ईओयू की टीम ने बेउर जेल स्थिति इनके कार्यालय कक्ष से मां विंध्यवासनी ट्रेडिंग, छतौनी, मोतिहारी का बैंक स्टेटमेंट, उषा इंडस्ट्रीज बसवरिया, मोतिहारी का ब्लैंक बैंक एनवायस, विधु कुमार पर पूर्व में लगे आरोपों से संबंधित तीन आवेदन पत्र जिसमें विधु कुमार के अवैध धनार्जन का आरोप है।

मोतिहारी में भी जेल अधीक्षक रहे थे विधु कुमार 

मोतिहारी में विधु कुमार के करीबी मित्र के घर से टैक्स एनवायस के साथ 13 महंगी एसयूवी गाडिय़ां जबकि सीए के ठिकानों से बैंक खातों के स्टेटमेंट और शैलजा देवी एवं गोपाल शरण के नाम जमीन क्रय से जुड़ी पांच डीड की छाया प्रति बरामद की गई थी. मामला अभी जांच में है. इधर सरकार ने विधु कुमार को फील्ड में जगह (जेल अधीक्षक) के रूप में पोस्टिंग दे दी है.