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31-Jan-2026 01:44 PM
By First Bihar
Bihar NEET student case : बिहार में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के मामले को अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हवाले कर दिया गया है। बिहार सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने फेसबुक पोस्ट के जरिए सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका बयान न केवल इस केस तक सीमित है, बल्कि बिहार की समग्र कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक क्षमता पर भी सीधा हमला माना जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि NEET छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के मामले का उद्भेदन करने के बजाय बिहार सरकार ने इसे CBI को सौंपकर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा “भ्रष्ट, अयोग्य, अदक्ष और अनप्रोफेशनल” हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार पुलिस एक जघन्य अपराध को सुलझाने में भी असमर्थ साबित हुई है, जो सरकार और उसकी कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि यह केवल पुलिस की विफलता नहीं है, बल्कि उससे भी बड़ी विफलता उस “बड़बोली एनडीए सरकार” की है, जिसके मंत्री और मुख्यमंत्री दिन-रात अपराधियों को पकड़ने के बड़े-बड़े दावे करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपराध पर भाषण देना आसान है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न्याय दिलाना सरकार के बस की बात नहीं रह गई है। उनके मुताबिक, यह मामला सरकार के “करप्ट और कंप्रोमाइज़्ड तंत्र” की सच्चाई को उजागर करता है।
अपने पोस्ट में तेजस्वी यादव ने नवरुणा कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि उस मामले में CBI ने 12-13 वर्षों तक जांच की, लेकिन आज तक न तो आरोपियों को पकड़ा जा सका और न ही पीड़ित परिवार को न्याय मिला। अंततः जांच बंद कर दी गई। तेजस्वी यादव ने आशंका जताई कि NEET छात्रा के मामले में भी यही हश्र हो सकता है—लंबी जांच, अनिश्चितता और अंत में न्याय का अभाव।
उन्होंने चुनावों के दौरान “जंगलराज” का मुद्दा उठाने वाली सत्तारूढ़ पार्टी पर भी निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने सवाल किया कि जो लोग चुनावों में बार-बार जंगलराज का डर दिखाते थे, वे अब कहां हैं? आज जब राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तब उनकी जुबान क्यों खामोश है? उन्होंने पूछा कि बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट कानून-व्यवस्था की जवाबदेही आखिर कौन लेगा।
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में भी “हेडलाइन मैनेजमेंट” के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकती है। उनका कहना है कि केस को CBI को सौंप देना कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह अपनी नाकामी छिपाने का तरीका है। अगर राज्य की पुलिस और प्रशासन सक्षम होते, तो इस जघन्य अपराध के दोषियों को अब तक सजा के कटघरे में खड़ा किया जा सकता था।