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Bihar road projects : बिहार की सड़क परियोजनाओं की धीमी रफ़्तार पर केंद्र सख्त, नितिन गडकरी ने 16–17 फरवरी को बुलाई अहम बैठक

Bihar road projects : बिहार की लंबित नेशनल हाईवे परियोजनाओं पर केंद्र सरकार सख्त हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने सूची तलब की है। 16–17 फरवरी को नितिन गडकरी दिल्ली में इन परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे।

31-Jan-2026 07:48 AM

By First Bihar

Bihar road projects : बिहार में नेशनल हाईवे से जुड़ी लंबित सड़क परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर उन सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की विस्तृत सूची मांगी है, जिन पर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। इस कड़ी में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 16 और 17 फरवरी को दिल्ली में बिहार की सड़क परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे।


मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि खासकर 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की नियमित और कड़ी निगरानी अब केंद्र सरकार के स्तर पर की जाएगी। बैठक में यह देखा जाएगा कि किन कारणों से परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो सकीं और उन्हें जल्द शुरू कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।


विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस समीक्षा बैठक में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के एनएच डिविजन द्वारा संचालित और प्रस्तावित परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा होगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत सड़क परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। इसके साथ ही उन परियोजनाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा, जिनका टेंडर तो हो चुका है लेकिन अब तक कार्य अवार्ड नहीं हो सका है, या फिर जिनका काम अवार्ड होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।


केंद्र सरकार बिहार में मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव की स्थिति की भी समीक्षा करेगी। खराब रखरखाव, धीमी मरम्मत और ट्रैफिक दबाव जैसे मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है।समीक्षा के दायरे में समस्तीपुर–दरभंगा के बीच बन रहे आरओबी (रेल ओवर ब्रिज) को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा मानगोबंदर, केंदुआ, झाझा, नरगंजो और भैरोगंज बाइपास, भागलपुर–ढाका मोड़, अरवल पुल, एनएच-727ए के तहत सीवान में जीर्णोद्धार कार्य, मुसरीघरारी में आरओबी, बूढ़ी गंडक नदी पर मेहरौना घाट में बन रहा पुल, कटिहार बाइपास, दाउदनगर, नासरीगंज और दावथ बाइपास जैसी कई अहम परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनका काम अवार्ड होने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो सका है।


इसके साथ ही पटना–आरा–सासाराम फोरलेन, वाराणसी–रांची–कोलकाता हाइवे, आरा बाइपास, रामनगर–कच्ची दरगाह, किशनगंज–बहादुरगंज, मानिकपुर–साहेबगंज, सुअरा–गड़हनी, बख्तियारपुर–रजौली पैकेज-एक, एनएच-227ए मेहरौनाघाट–सीवान, दरभंगा–बनवारीपट्टी, चौसा–बक्सर बाइपास, शेखपुरा, जमुई और खैरा बाइपास जैसी बड़ी परियोजनाएं भी समीक्षा सूची में शामिल हैं, जिनका निर्माण कार्य अभी तक जमीन पर नहीं उतर सका है।


सूत्रों के मुताबिक, बैठक में केंद्र सरकार इन सभी परियोजनाओं को अविलंब शुरू करने के लिए सख्त निर्देश दे सकती है। भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, तकनीकी अड़चन, एजेंसियों की सुस्ती और प्रशासनिक देरी जैसे कारणों पर जवाबदेही तय किए जाने की संभावना है।


कुल मिलाकर, बिहार में बेहतर सड़क नेटवर्क और सुचारु ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार अब सीधे एक्शन मोड में है। हालांकि, बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं अभी भी छोटी-बड़ी अड़चनों में फंसी हुई हैं। आने वाली समीक्षा बैठक से यह उम्मीद की जा रही है कि इन बाधाओं को दूर कर परियोजनाओं को गति दी जाएगी, जिससे बिहार में सड़क कनेक्टिविटी और विकास को नई रफ्तार मिल सके।