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13-May-2021 07:00 AM
PATNA : बिहार में कोरोना वैक्सीन के सिर्फ साढ़े तीन लाख डोज के सहारे शुरू हुए 18 से 45 की उम्र वालों के वैक्सीनेशन का काम रूकने की आशंका फिलहाल खत्म हो गयी है. राज्य सरकार को 6 लाख से ज्यादा वैक्सीन के औऱ डोज मिल गये हैं. सरकार कह रही है कि अब वैक्सीनेशन की रफ्तार औऱ तेज की जायेगी. लेकिन फिर भी बिहार को जितने वैक्सीन डोज की जरूरत है उसके मुताबिक आपूर्ति शून्य के बराबर ही माना जा सकता है.
दरअसल बिहार में पिछले 9 मई से 18 से 45 तक की उम्र वालों का वैक्सीनेशन शुरू किया गया था. सरकार ने जानकारी थी कि कोविशील्ड वैक्सीन के साढ़े तीन लाख डोज उसे मिल हैं उसी के सहारे वैक्सीनेशन शुरू की जा रही है. लेकिन बिहार में वैक्सीन लेने वालों की तादाद को देखते हुए ये संख्या नगण्य थी. आलम ये हो रहा था कि कुछ जगहों पर लॉटरी निकाल कर वैक्सीन देने की भी खबरें आ रही थीं.
बुधवार को 6 लाख 14 हजार वैक्सीन और मिले
वैक्सीन नहीं होने के कारण बिहार में टीकाकरण का काम रूक जाने की आशंका उत्पन्न हो गयी थी. लेकिन बुधवार को बिहार सरकार को 6 लाख 14 हजार वैक्सीन डोज औऱ मिल गये. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि 18 से 45 वर्ष तक की उम्र वालों के वैक्सीनेशन के लिए बिहार को 6 लाख 14 हजार वैक्सीन डोज औऱ मिल गये हैं. ये डोज बुधवार को पटना पहुंच गये हैं. राज्य सरकार को सीरम इंस्टीच्यूट से 5 लाख कोविशील्ड वैक्सीन मिला है. वहीं भारत बायोटेक से 1 लाख 14 हजार कोवैक्सिन प्राप्त हुआ है. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नये वैक्सीन डोज मिलने के बाद सूबे में वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज की जायेगी.
ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन
हालांकि बिहार में वैक्सीन लेने वालों की तादाद को देखते हुए आपूर्ति बेहद कम है. सूबे में 18 से 45 उम्र वालों की तादाद लगभग साढ़े पांच करोड बतायी जाती है. उन्हें वैक्सीन का दो डोज देने के लिए 11 करोड़ डोज चाहिये. लेकिन अब तक लगभग साढ़े नौ लाख डोज मिले हैं. सरकार कह चुकी है कि मई महीने में उसे वैक्सीन के लगभग 13 लाख डोज ही मिल पायेंगे. इस रफ्तार से वैक्सीनेश चलती रही तो फिर ये काम कब पूरा हो पायेगा ये बता पाना मुमकिन नहीं है.
उधर बुधवार को ही पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने बिहार सरकार को सलाह दी है कि वह विदेशों से वैक्सीन मंगवाये. सुशील मोदी ने कहा है कि बिहार सरकार को केंद्र सरकार और स्वदेशी टीके पर निर्भर रहने की बजाय राज्य सरकार को दुनिया के किसी भी देश से कोरोना टीका प्राप्त करने के लिए ग्लोबल टेंडर निकालने पर विचार करना चाहिए. उनके मुताबिक 11 करोड़ की आबादी वाले बिहार को 18 से ज्यादा उम्र वालों को वैक्सीन देने के लिए वैक्सीन के करोडो डोज चाहिये होगा. वैक्सीन के इतने डोज की आपूर्ति करना भारत की वैक्सीन कंपनियों के लिए संभव नहीं है. ऐसे में बिहार के लिए रास्ता यही बचता है कि वैक्सीन सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले. यानि विदेशों से वैक्सीन मंगवायी जाये.
सुशील मोदी ने कहा है कि देश के कई दूसरे राज्यों ने विदेश से वैक्सीन मंगवाने की कोशिश शुरू कर दी है. आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे कई राज्यों ने कोरोना वैक्सीन के सीधे आयात की सम्भावना पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति बनायी है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमन्त्री जगन मोहन ने तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ग्लोबल टेंडर निकालने के मुद्दे पर अनुरोध भी कर दिया है. सुशील मोदी के मुताबिक बिहार में कोरोना वैक्सीनेशन के लिए पैसे की कमी नहीं है. बिहार सरकार कोरोना वैक्सीन और टीकाकरण के लिए 4,165 करोड़ रुपये खर्च करने की सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है. इसमें से 1000 करोड़ तत्काल आवंटित भी किया जा चुका है. यानि वैक्सीन के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है. उधर भारत की वैक्सीन कंपनियां रातों रात उत्पादन बढ़ा कर वैक्सीन की जरूरत समय पर पूरा नहीं कर सकतीं. फिर देर क्यों. तत्काल बिहार सरकार को ग्लोबल टेंडर का विकल्प अपना कर बिहार में वैक्सीन मंगवाना चाहिये.