BEGUSARAI: साढ़े 7 कट्ठा जमीन के लिए वरुण चौधरी की हत्या, CCTV फुटेज से मामले का हुआ खुलासा पिस्टल से फायरिंग करते वीडियो सामने आने पर दानिश रिजवान ने दी सफाई, कहा..20 लाख रंगदारी नहीं दिये तब AI जेनरेटेड फर्जी क्लिप कर दिया वायरल काम पर नहीं लौटने वाले अंचलाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, रिटायर CO को कॉन्ट्रैक्ट पर किया जाएगा बहाल तिरहुत बांध नहर निर्माण में दर्दनाक हादसा: रोड रोलर की चपेट में आया मासूम, मौके पर मौत कानून को ठेंगा! मांझी के सबसे करीबी ने पुलिस से पिस्टल लेकर ताबड़तोड़ फायरिंग की, RJD ने वीडियो जारी कर सरकार को घेरा रेस्टोरेंट के बिल में छुपा ‘गैस चार्ज’? अब नहीं चलेगी मनमानी, ऐसे करें तुरंत शिकायत ए नीतीश जी, बिहार छोड़के काहे जात बानी..2030 तक रहे के बा, भोजपुर में बुजुर्ग और युवक ने मुख्यमंत्री को कर दिया भावुक सिकरहना नदी में दर्दनाक हादसा: शौच के दौरान फिसलकर डूबा 12 वर्षीय बालक, 6 घंटे बाद मिला शव देश के किसी भी व्यक्ति को वंदे मातरम से नफरत नहीं होनी चाहिए, छात्रावास के निरीक्षण के बाद बोले मंत्री लखिन्द्र कुमार रौशन Pradosh Vrat 2026: मार्च का आखिरी सोम प्रदोष व्रत कब? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि
05-Apr-2024 09:25 PM
By First Bihar
PATNA: बिहार में लगातार बढ़ती जा रही गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार एक्शन में आयी है. बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने सारे महकमों के लिए एडवायजरी जारी कर दी है. सारे विभागों के बड़े अधिकारियों को इस एडवायजरी पर अमल करने की हिदायत दी गयी है. आपदा प्रबंधन विभाग ने स्कूलों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताते हुए कई निर्देश दिये हैं. लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि मुख्यमंत्री तक की बात नहीं मानने वाले शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक इसे मानेंगे.
स्कूल की टाइमिंग बदले या छुट्टी घोषित करें
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से शिक्षा विभाग को भेजे गये एडवायजरी में स्कूली बच्चों को भीषण गर्मी से बचाने का उपाय करने को कहा गया है. आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि बच्चों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए ये जरूरी है कि स्कूल या तो सुबह की पाली में चले नहीं तो गर्मी की छुट्टी को निर्धारित समय से पहले घोषित कर दी जाए. अगर जरूरी हो तो गर्मी की स्थिति को देखते हुए स्कूलों को कुछ दिनों के लिए बंद भी किया जा सकता है.
केके पाठक से फिर टकराव की नौबत
आपदा प्रबंधन विभाग ने सारे जिलाधिकारियों को स्कूलों की टाइमिंग और छुट्टी के संबंध में फैसला लेने के लिए अधिकृत किया है. इस आदेश से एक बार फिर केके पाठक से टकराव की नौबत आ सकती है. बता दें कि भीषण सर्दी में जब जिलाधिकारियों ने स्कूल बंद करने का आदेश जारी किया था तो केके पाठक ने उसे अवैध करार दिया था. केके पाठक ने लंबा चौड़ा पत्र लिख कर कहा था कि जिलाधिकारी स्कूल बंद नहीं करा सकते औऱ स्कूलों को बंद करने के फैसले से पहले हर हाल में शिक्षा विभाग की अनुमति ली जाये. अब आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि स्कूल बंद करने या उनकी टाइमिंग तय करने का फैसला जिलाधिकारी लें. ऐसे में फिर से टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. वैसे, आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी स्कूलों और परीक्षा केंद्रों पर पेयजल के साथ साथ ओआरएस की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है.
अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार रहे
बिहार में लगातार बढ़ती जा रही गर्मी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को खास तौर पर तैयार रहने को कहा है. गर्मी और लू से पीड़ित व्यक्तियों के इलाज के लिए जरूरत के हिसाब से अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था करने को कहा गया है. जहां गर्मी का प्रकोप ज्यादा हो वहां स्टैटिक और चलंत चिकित्सा दल की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है. आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल, सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल और मेडिकल कालेजों को विशेष व्यवस्था के साथ तैयार रहने को कहा है.
पेयजल का इंतजाम हो
आपदा प्रबंधन विभाग ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्थानीय निकायों को कहा है कि वे अपने स्तर से प्याऊ की व्यवस्था करें. यहां लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी का इंतजाम हो. नगर निकायों और पंचायतों को कहा गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत खराब चापाकलों की मरम्मत युद्धस्तर पर कराएं.
भूगर्भ जल स्तर की समीक्षा हो
आपदा प्रबंधन विभाग ने पीएचईडी कहा है कि वह भूगर्भ जलस्तर की लगातार समीक्षा करते रहे. इसकी लगातार निगरानी होती रहे.
मजदूरों की कार्य अवधि बदली
आपदा प्रबंधन विभाग ने भीषण गर्मी और लू के दौरान मजदूरों की कार्य अवधि में बदलाव करने को कहा है. मजदूरों से सुबह छह बजे से 11 बजे और अपराह्न 3.30 बजे से 6.30 बजे तक काम कराने को कहा गया है.
सार्वजनिक परिवहन की संख्या कम हो
आपदा प्रबंधन विभाग ने परिवहन विभाग को कहा है कि लू की वजह से जहां तक संभव हो वाहनों के परिचालन को कम किया जाए. दिन के 11 बजे से साढ़े तीन बजे दिन तक सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों के परिचालन को नियंत्रित किया जा सकता है.