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19-Feb-2026 07:43 AM
By First Bihar
Bihar land registration : बिहार सरकार ने भूमि दस्तावेज निबंधन (रजिस्ट्री) प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और आसान बनाने के लिए एक नया कदम उठाया है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने यह व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 से, यानी 1 अप्रैल से लागू करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सात निश्चय-3 योजना के तहत ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के दृष्टिकोण को मजबूत करना और भूमि अंतरण के दौरान नागरिकों को सुविधा प्रदान करना है।
नई व्यवस्था के तहत निबंधन और दाखिल-खारिज से पहले खरीदार और विक्रेता को भूमि से संबंधित पूरी अपडेट जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न केवल भूमि अंतरण प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि अनावश्यक कानूनी विवाद और झंझटों में भी कमी आएगी। अधूरी जानकारी के कारण होने वाले विवादों की रोकथाम का यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आवेदक को ई-निबंधन पोर्टल पर अकाउंट बनाकर लॉग इन करना होगा। इसके बाद भूमि से जुड़ी 13 महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज करनी होंगी, जिनमें निबंधन कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा संख्या, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी संख्या, जमाबंदी धारक का नाम, क्रेता-विक्रेता का नाम और भूमि का प्रकार शामिल हैं।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निबंधन से पहले आवेदक को यह विकल्प मिलेगा कि वह भूमि की अपडेट जानकारी प्राप्त करना चाहता है या नहीं। यदि विकल्प ‘हां’ चुना जाता है, तो यह जानकारी संबंधित अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी को भेजी जाएगी। इसके बाद दोनों पक्षों को एसएमएस के माध्यम से सूचना प्राप्त होगी।
अंचल अधिकारी को 10 दिनों के भीतर भूमि की अद्यतन जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। यदि अधिकारी द्वारा समय पर जानकारी नहीं दी जाती है, तो आवेदक की ओर से दी गई जानकारी पूर्ण मानी जाएगी और आवेदन अपने आप आगे बढ़ जाएगा।
यह सुविधा विशेष रूप से रैयती भूमि पर लागू होगी, जिससे भूमि विवादों में कमी आएगी और नागरिकों को भूमि संबंधी सटीक जानकारी मिलने से उनके जीवन में आसानी होगी। इस कदम से भूमि लेन-देन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, लोगों का समय बचेगा और प्रशासनिक स्तर पर कार्य भी सरल होगा।
निबंधन विभाग का मानना है कि यह नई प्रणाली भूमि विवादों को रोकने के साथ ही नागरिकों की शिकायतों में भी कमी लाएगी। अब भूमि खरीदार और विक्रेता दोनों ही किसी भी लेन-देन से पहले पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें भविष्य में किसी भी कानूनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार का यह प्रयास भूमि लेन-देन में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भविष्य में इस प्रक्रिया को और डिजिटल और उपयोगकर्ता-मित्रवत बनाने पर भी काम किया जाएगा।