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Bihar Education News: बड़े-बड़े अफसर-MP-MLA पर भारी एक सहायक अभियंता ! 6 cr की अवैध निकासी की कोशिश मामले में DPO ने DEO से केस दर्ज करने की अनुमति मांगी..नहीं मिली, सेवा समाप्ति वाली फाइल दबा दी गई, है न ताकतवर ?

मोतिहारी में शिक्षा विभाग में करोड़ों की निकासी की कोशिश मामले में आरोपी सहायक अभियंता को बचाने का खुला खेल जारी है। डीईओ ने एफआईआर की अनुमति नही दी, कोई कार्रवाई नहीं हुई। अनुश्रवण समिति अध्यक्ष का निर्देश भी रद्दी की टोकरी में।

01-Aug-2025 11:31 AM

By Viveka Nand

Bihar Education News: बिहार का सरकारी सिस्टम बेपटरी हो गया है. चारो तरफ लूट मची हुई है. करोड़ों की सरकारी राशि की गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों-इंजीनियरों को बचाने का खेल चल रहा है. शिक्षा विभाग जिसका काम नौनिहालों के भविष्य को संवारना है, उसके अधिकारी अपना पेट भरने में लगे हैं. मोतिहारी का एक बड़ा ही गंभीर मामला सामने आया है. भ्रष्टाचार के आरोप में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी निलंबित हुए, पर अवैध निकासी के खेल में शामिल सर्व शिक्षा अभियान के एक सहायक अभियंता पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई. कार्रवाई को लेकर सारे आदेश रद्दी की टोकरी में फेक दिए जा रहे हैं. आरोपी सहायक अभियंता की सेवा समाप्ति की बात तो दूर, केस दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) ने उक्त सहायक अभियंता के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांगी थी. दो महीना बीतने के बाद भी मोतिहारी डीईओ ने केस दर्ज करने का आदेश नहीं दिया. समझ सकते हैं, किसके इशारे पर सहायक अभियंता को बचाया जा रहा है.  

खेल करने वाले आरोपी एई को बचाने की चाल 

एक बार फिर से मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी कटघरे में है. यहां भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने का खेल चल रहा है. जबकि कुछ समय पहले ही मोतिहारी के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी को गड़बड़ी करने के आरोप में सस्पेंड भी किया गया था. इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा. डीपीओ ने एक सहायक अभियंता जिसने अवैध तरीके से लगभग 6 करोड़ की राशि भुगतान की कोशिश की, उसके खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांगी, आज तक वो आदेश प्राप्त नहीं हुआ. लिहाजा उक्त सहायक अभियंता पर केस दर्ज नहीं हुआ. जिला अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष सह स्थानीय सांसद ने भी उक्त सहायक अभियंता की सेवा समाप्ति को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी को आदेश दिया, कोई असर नहीं. 

अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष सह सांसद ने हटाने को कहा,कोई एक्शन नहीं 

अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष के आदेश के एक माह बाद भी सहायक अभियंता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अध्यक्ष के आदेश को शिक्षा विभाग के अधिकारी रद्दी के टोकरी में डालकर सहायक अभियंता पर मेहरबान दिख रहे हैं. 14 जून को जिला शिक्षा अनुश्रवण समिति की बैठक में विद्यालयों में हुए असैनिक कार्यो की समीक्षा के दौरान कई विधायक व विधान पार्षदों ने कार्य के गुणवत्ता पर भारी असंतोष जताया था ।जिसपर तत्कालीन डीईओ ने अध्यक्ष को बताया था कि सहायक अभियंता (एसएसए) की लापरवाही व अनुशासनहीनता को लेकर राज्य परियोजना निदेशक को पत्र भेजकर सेवा समाप्ति के अनुरोध किया गया था । लेकिन अबतक करवाई नही किया गया। जिसपर अनुश्रवण समिति अध्यक्ष ने तत्कालीन डीईओ व डीपीओ (एसएसए) को सहायक अभियंता की सेवा समाप्ति के लिए अनुशंसा कर डीएम के माध्यम से  विभाग को पत्र भेजने का निर्दश दिया था। लेकिन आदेश के डेढ़ माह बाद भी रिपोर्ट नहीं भेजी गई। 

राशि भुगतान को लेकर सहायक अभियंता पर फर्जी पत्र जारी कराने का आरोप  

बता दें, सर्व शिक्षा अभियान के इसी सहायक अभियंता पर डीपीओ (एसएसए) का फर्जी पत्रांक-दिनांक के माध्यम से लगभग 6 करोड़ की राशि भुगतान कराने के प्रयास के भी आरोप लगे थे. मामले में तत्कालीन डीपीओ (एसएसए) द्वारा A.E. से स्पष्टीकरण व तीन बार रिमाइंडर के बाद भी जब उक्त सहायक अभियंता ने जवाब नहीं दिया, इसके बाद केस दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी. डीपीओ एसएसए ने तत्कालीन डीईओ से सहायक अभियंता पर FIR करने की अनुमति के लिए पत्र भेजा गया था । 

उक्त सहायक अभियंता के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति डीईओ ने नहीं दी

मोतिहारी के तत्कालीन डीईओ का खेल देखिए... इतना भारी फर्जीवाड़ा का प्रयास करने वाले सहायक अभियंता के खिलाफ FIR का आदेश नही दिया गया । बताते चले कि स्कूल के असैनिक कार्यो में हुए भारी घोटाले को लेकर दो तत्कालीन डीईओ पर विभाग ने कार्रवाई किया. जिसमे तत्कालीन डीईओ संजय कुमार निलंबित हुए, वहीं दूसरे डीईओ संजीव कुमार पर प्रपत्र क गठित किया गया. इसके बाद भी भ्रष्टाचार के खेल में शामिल अधिकारियों का मनोबल नहीं गिर रहा. 

सर्व शिक्षा अभियान मोतिहारी के डीपीओ खुद को इस मामले से अनभिज्ञता जताते हैं, वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी भी पूर्व वाले डीईओ के कार्यकाल का मामला बताकर पूरे मामले से बचने की कोशिश में जुटे हैं.