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11-Jan-2026 01:04 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Board: बिहार में स्कूली छात्रों की अपार आईडी को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। करोड़ों बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए इस आईडी को अहम माना जा रहा है, लेकिन राज्य में इसका निर्माण बेहद धीमी गति से हो रहा है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लाखों छात्रों की अपार आईडी नहीं बन पाई है। इसी बीच सीबीएसई द्वारा अपार आईडी को अनिवार्य किए जाने से बिहार के छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने अपार आईडी निर्माण की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताई है। परिषद ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को फटकार लगाते हुए इस प्रक्रिया में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। जारी पत्र के अनुसार, वर्ष 2025 में राज्य के केवल 58.50 प्रतिशत छात्रों की ही अपार आईडी बन सकी है। इसका अर्थ है कि अभी भी करीब 85 लाख बच्चों की अपार आईडी बनना बाकी है, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 30 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच पूरे बिहार में महज 11,410 अपार आईडी ही तैयार की जा सकीं। परिषद ने इस प्रगति को बेहद निराशाजनक बताया है। कई जिलों में स्थिति और भी खराब है। समस्तीपुर, मधुबनी, खगड़िया, पूर्णिया, शेखपुरा, नालंदा, रोहतास, अरवल और कैमूर जैसे जिलों में एक सप्ताह के भीतर 100 से भी कम छात्रों की अपार आईडी बन पाई, जो जमीनी स्तर पर काम की सुस्ती को दर्शाता है।
अपार आईडी का उद्देश्य छात्रों से जुड़े शैक्षणिक डेटा को एकीकृत और सुरक्षित रखना है, ताकि नीति निर्माण, योजना और विश्लेषण को बेहतर बनाया जा सके। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू की गई है। शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों को सभी छात्रों का अपार आईडी पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सीबीएसई द्वारा इसे अनिवार्य किए जाने के बाद अब राज्य में इस कार्य को तेज करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।