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04-Nov-2025 10:06 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में एक बार फिर पुल धंसने की घटना सामने आई है। अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड में कौआचार गांव को जोड़ने वाली परमान नदी पर बने कविलासी पुल का बीच का तीसरा पाया धंस गया है। इससे स्थानीय लोगों की दैनिक आवागमन में भारी बाधा उत्पन्न हो गई है। इससे पहले, सिकटी विधानसभा क्षेत्र के बकरा नदी पर पड़रिया में बन रहे पुल के धंसने का मामला भी थमा नहीं था, और अब ग्रामीण क्षेत्र में नई समस्या सामने आई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कविलासी पुल 2019 में 129 मीटर लंबाई के साथ बनाया गया था। इसका अनुमानित निर्माण खर्च 4.15 करोड़ रुपये था, जबकि वास्तविक निर्माण लागत 3.82 करोड़ रुपये रही। पुल के धंसने के बाद प्रशासन ने आवागमन रोक दिया है। यह पुल कौआचार, पटेगा, ताराबाड़ी, मदनुपर और कुर्साकांटा को जोड़ता है और ग्रामीण जीवन एवं कृषि परिवहन के लिए महत्वपूर्ण था।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने बताया कि इस मामले की जानकारी विभाग को पहले ही 30 अक्टूबर 2025 को लिखित रूप में दी जा चुकी थी। पुल का निर्माण कोसी कंट्रक्शन द्वारा कराया गया था। हालांकि संवेदक ने अपनी पांच साल की कार्य अवधि पूरी कर ली है, लेकिन पुल की उम्र और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई विभागीय अधिकारियों के निर्देशानुसार की जाएगी।
बता दें कि अररिया में पुल धंसने की यह दूसरी घटना नहीं है। 18 जून 2024 को सिकटी-कुर्साकांटा को जोड़ने वाले पड़रिया पुल का निर्माणाधीन हिस्सा धंस गया था। उस समय इस परियोजना पर खर्च की जा रही राशि 12 करोड़ रुपये थी। इन घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही सड़क एवं पुल निर्माण में अनियमितताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनावी दृष्टिकोण से यह घटना विपक्ष के लिए चुनावी मुद्दा बन गई है। स्थानीय जनता और विपक्षी दलों ने सरकार की असफलता और लापरवाही को चुनावी प्रचार में भुनाया है। उनका कहना है कि बिहार में चुनावी माहौल में ऐसी घटनाएं ग्रामीण विकास और जनता के हितों के प्रति प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठाती हैं। विशेषकर अररिया जिले में विकास परियोजनाओं में हुई देरी और तकनीकी खामियों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है।
स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों का कहना है कि पुल धंसने की घटनाओं ने लोगों की आवागमन सुविधा और कृषि परिवहन प्रभावित किया है। साथ ही, आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में इसे विकास विफलता के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। ग्रामीण जनता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्दी सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो यह चुनावी रैलियों और जनसभा के मुद्दे में बदल जाएगा। इस तरह अररिया में पुल धंसने की घटनाएं न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनावी माहौल में विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका भी दे रही हैं।