धर्मरथ सप्तमी 2025, सूर्य देव की पूजा का महत्व और विधि
रथ सप्तमी एक विशेष हिंदू पर्व है जो माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है, जो आत्मा के कारक माने जाते हैं।

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धर्मरथ सप्तमी एक विशेष हिंदू पर्व है जो माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है, जो आत्मा के कारक माने जाते हैं।
Breakingधर्मMaha Kumbh 2025: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी महाकुंभ का हिस्सा बने हैं. सोमवार को वह दिल्ली से प्रयागराज पहुंचे और सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई.
धर्मप्रदोष व्रत हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है, जो विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित होता है। यह व्रत प्रत्येक माह में दो बार किया जाता है, जिनमें से एक सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम कहलाता है।
धर्मजीवन में कई बार हम भय, आशंका और अनिश्चितता के दौर से गुजरते हैं। ऐसे क्षणों में मन विचलित हो उठता है, और यह सवाल सताने लगता है कि भविष्य कैसा होगा।
धर्महर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि जगत की पालनकर्ता और रक्षक मां दुर्गा को समर्पित होती है। इस पवित्र दिन पर श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और व्रत रखकर उनसे सुख-समृद्धि और जीवन की समस्त समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं।
धर्महर माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है।
धर्महिंदू धर्म में फाल्गुन माह को विशेष रूप से शुभ और आनंददायक माना जाता है। यह माह माघ पूर्णिमा के बाद शुरू होता है और अपने साथ होली जैसे रंगों और उल्लास के महापर्व को लेकर आता है।
धर्महिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की उपासना की जाती है। इन व्रतों में माघ माह की जया एकादशी को बेहद शुभ माना गया है।
धर्महिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, जिसे पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का दिन माना जाता है। प्रत्येक अमावस्या का दिन पितरों के लिए समर्पित होता है, लेकिन माघ मास की अमावस्या, जिसे "मौनी अमावस्या" कहा जाता है।
धर्मवास्तु शास्त्र जीवन के हर पहलु में संतुलन और सुख-शांति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल घर और परिवार की सुख-शांति के लिए, बल्कि हमारे करियर और पेशेवर जीवन में भी सफलता पाने के लिए बेहद प्रभावी हो सकता है।
धर्मदेवकी, मथुरा के राजा उग्रसेन की पुत्री और कंस की बहन, भारतीय पौराणिक कथाओं में एक अद्वितीय स्थान रखती हैं। उनका विवाह वासुदेव से हुआ और वे द्वापर युग में भगवान कृष्ण की माता के रूप में पूजनीय हैं। लेकिन उनका महत्व केवल कृष्ण की माता तक सीमित नहीं है।
धर्मबसंत पंचमी, जो माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है, विशेष रूप से शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती के पूजन का दिन होता है।