1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Tue, 05 Aug 2025 07:53:25 PM IST
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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं लेकिन रक्षाबंधन के बाद अक्सर मन में यह सवाल उठता है कि राखी को कितने दिनों तक कलाई पर बांधे रखना चाहिए? आइए जानें इस परंपरा के पीछे की मान्यताएं...
राखी को तुरंत उतारना शुभ नहीं माना जाता
सनातन धर्म में किसी भी शुभ वस्तु या पवित्र धागे को तुरंत उतारना अशुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी को रक्षा सूत्र माना जाता है, जो भाई की रक्षा और ऊर्जा का कवच बनकर कार्य करता है। इसलिए इसे कम से कम 15 दिन तक कलाई पर बांधकर रखना शुभ और फलदायी माना गया है। इस अवधि को 'पंद्रह दिन का त्योहार' भी कहा जाता है, जो भाई-बहन के रिश्ते को और भी गहराई देता है।
जन्माष्टमी तक रखें तो मिलेगा विशेष फल
कुछ परंपराओं के अनुसार, राखी को जन्माष्टमी तक बांधे रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को और जन्माष्टमी 15 अगस्त 2025 को है। इस अवधि तक राखी को कलाई पर रखने से भाई को विशेष आशीर्वाद और सुरक्षा मिलती है। इसके बाद राखी को पवित्र स्थान, जैसे किसी वृक्ष के नीचे या बहते जल में सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाना चाहिए।
दशहरे तक राखी बांधे रखने की परंपरा
कुछ क्षेत्रों में ऐसी भी मान्यता है कि राखी को दशहरा तक पहना जाता है। दशहरा, बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है और इस दिन तक राखी भाई के लिए रक्षा कवच का काम करती है। माना जाता है कि इस दिन तक राखी बांधने से भाई को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी शुभ
पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राखी को पूर्णिमा से लेकर 15-16 दिन तक बांधे रखना अत्यंत शुभ होता है। 16वें दिन राखी को किसी नदी या पवित्र जल स्रोत में प्रवाहित करना चाहिए। इससे भाई के जीवन में लंबी आयु, सफलता और खुशहाली बनी रहती है।
राखी का सम्मानपूर्वक करें विसर्जन
राखी एक पवित्र और भावनात्मक धागा है, इसे कभी भी कूड़े में न फेंकें। अगर राखी टूट जाए या गंदी हो जाए, तो उसे तुलसी के पौधे के पास रखकर प्रार्थना के साथ विदा करें। वहीं, यदि आपके पास नदी न हो, तो राखी को किसी पवित्र वृक्ष के नीचे या मंदिर परिसर में भी रखा जा सकता है।