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नवरात्रि में कलश स्थापना से पहले जान लें शुभ मुहूर्त और विधि

DESK : शारदीय नवरात्र की शुरुआत कुछ ही दिनों में होने वाली है. इसके लिए भक्तों द्वारा हर तरह से तैयारी की जा रही है ताकि विधि विधान से पूजा अर्चना कर देवी मां को प्रसन्न

नवरात्रि में कलश स्थापना से पहले जान लें शुभ मुहूर्त और विधि
Anamika
3 मिनट

DESK : शारदीय नवरात्र  की शुरुआत कुछ ही दिनों में होने वाली है. इसके लिए भक्तों द्वारा हर तरह से तैयारी की जा रही है ताकि विधि विधान से पूजा अर्चना कर देवी मां को प्रसन्न कर विशेष फल की प्राप्ति हो सके. हालांकि इस बार कोरोना महामारी की वजह से पंडालों में मां दुर्गा की भव्य मूर्ति स्थापित करने पर रोक है. लेकिन इससे भक्तों के उत्साह में कमी नहीं दिखाई दे रही.

17 अक्तूबर को कलश स्थापना के साथ नव दुर्गा की पूजा शुरू होगी. नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्त्व है. कलश की स्थापना शुभ मुहूर्त देख कर  ही किया जाता है. उसके बाद ही नौ दिनों तक देवी मां का पूजा-पाठ, आरती, मंत्रोचार और व्रत रखकर आशीर्वाद प्राप्त की जाती है. 

कलश स्थापना का मुहूर्त

कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है. इस बार प्रतिपदा रात्रि 09.08 तक रहेगी. इस बार कलश की स्थापना के चार शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. पहला- सुबह 07.30 से 09.00 तक. दूसरा- दोपहर 01.30 से 03.00 तक. तीसरा- दोपहर 03.00 से 04.30 तक और शाम को 06.00 से 07.30 तक. इन चारो मुहूर्त में से कभी भी आप कलश की स्थापना कर सकते हैं. 

कलश की स्थापना कैसे करें

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए. इस के बाद पूजा की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और इस कपड़े पर थोड़े चावल रख दें . चावल रखते हुए भगवान्  गणेश  गणेश जी का स्मरण करें. फिर एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें अब इस  पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाना लें. इसके बाद मुख पर रक्षा सूत्र बांधें . फिर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिए. अब कलश के मुख को ढक्कन से ढकें. ढक्कन चावल से भरकर रखें. एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर रक्षा सूत्र से बांधें. इस नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आवाहन करें. अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करनी चाहिए. कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ाएं. नवरात्र में कलश स्थापित करने के लिए आप चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी के पात्र का इस्तेमाल कर सकते हैं.