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Hartalika Teej 2025: ये महिलाएं न रखें हरितालिका तीज व्रत, जानें... नियम और सावधानियां

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास होता है, लेकिन सभी महिलाओं को यह व्रत नहीं रखना चाहिए। जानें कौन-कौन सी महिलाएं इस व्रत से बचें और व्रत रखने के दौरान किन नियमों का पालन जरूरी है।

Hartalika Teej 2025
हरतालिका तीज व्रत
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Hartalika Teej 2025: भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं तथा अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से गौरी-शंकर का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।


हालांकि, हरतालिका तीज का व्रत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक निर्जला व्रत रखा जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाएं इस व्रत को न रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि निर्जला व्रत उनके स्वास्थ्य और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन वे इस दिन शिव-पार्वती की पूजा कर सकती हैं। इसी प्रकार, जो महिलाएं किसी बीमारी या शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं, उन्हें भी इस व्रत को रखने से बचना चाहिए। वे व्रत न रखकर भी श्रद्धा से पूजा कर सकती हैं।


बुजुर्ग महिलाएं, जिनकी शारीरिक क्षमता कम हो, उन्हें भी इस कठिन व्रत को छोड़कर फलाहार व्रत रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से भी उन्हें आध्यात्मिक लाभ मिलता है। कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं, लेकिन उन्हें निर्जला व्रत रखने की आवश्यकता नहीं होती; वे फलाहार व्रत रखकर पूजा कर सकती हैं।


मासिक धर्म की स्थिति में भी महिलाएं तीज का व्रत रख सकती हैं, लेकिन इस दौरान पूजा-पाठ करने से परहेज करना चाहिए। इस स्थिति में व्रत के नियमों का पालन करते हुए व्रत करना शुभ माना जाता है।


हरतालिका तीज का व्रत आध्यात्मिक और पारिवारिक सौभाग्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका पालन स्वास्थ्य की दृष्टि से संतुलित तरीके से करना चाहिए। अगर शारीरिक स्थिति ठीक न हो, तो व्रत की जगह पूजा-पाठ और फलाहार व्रत भी उतना ही फलदायक होता है। इसलिए महिलाएं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ही इस व्रत का पालन करें ताकि वे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकें और अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बना सकें।

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