देशभर में UGC के विरोध पर BJP में बेचैनी, मोदी सरकार की नीतियों को खिलाफ मुखर रहने वाला विपक्ष चुप क्यों?

UGC New Rules Controversy: यूजीसी के नए 'इक्विटी प्रमोशन नियम 2026' को लागू किए जाने के बाद सियासत गरमाई है। बीजेपी में विरोध बढ़ा है, खासकर अगड़ी जातियों से जुड़े नेताओं में, जबकि विपक्ष पूरी तरह खामोश है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Tue, 27 Jan 2026 01:43:52 PM IST

UGC New Rules Controversy

विपक्ष की चुप्पी पर सवाल - फ़ोटो Google

UGC New Rules Controversy: देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम लागू होते ही सियासत गरमा गई है। शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूजीसी ने ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ लागू किया है। एक ओर इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर खासतौर पर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई है।


यूजीसी के नए नियम को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर ही विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। कई मौजूदा और पूर्व सांसदों व विधायकों ने खुले तौर पर या परोक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। इसके उलट विपक्ष पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सबसे ज्यादा बेचैनी बीजेपी के नेताओं में ही क्यों नजर आ रही है। वहीं जेडीयू ने भी चुप्पी साध रखी है और वेट एंड वॉच की स्थिति में है।


नए नियम लागू होने के बाद अगड़ी जातियों में नाराजगी की चर्चा तेज है। राजनीतिक तौर पर अगड़ी जातियां लंबे समय से बीजेपी का कोर वोटबैंक मानी जाती रही हैं। ऐसे में उनकी असंतुष्टि ने पार्टी के कई नेताओं को असमंजस में डाल दिया है। कुछ नेता खुलकर तो कुछ दबी जुबान में विरोध जता रहे हैं। 


इसके पीछे धारणा यह बताई जा रही है कि राजनीति का केंद्र दलित और ओबीसी समुदायों तक सीमित होता जा रहा है और अगड़ी जातियां खुद को सियासी एजेंडे से बाहर महसूस कर रही हैं। इसी आशंका के चलते बीजेपी नेताओं को लग रहा है कि अगर वे इस मुद्दे पर चुप रहे, तो उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर हो सकती है।


दिलचस्प बात यह है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर सियासत गरमाने के बावजूद विपक्ष पूरी तरह खामोश है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आरजेडी से लेकर कांग्रेस तक किसी ने भी खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीजेपी नेताओं की बेचैनी के बीच विपक्ष की यह चुप्पी कई सियासी सवाल खड़े कर रही है। 


मोदी सरकार की नीतियों का मुखर विरोध करने वाला विपक्ष इस मुद्दे पर चुप क्यों है, इसकी वजह राजनीतिक बताई जा रही है। मौजूदा समय में विपक्षी दलों की राजनीति दलित और ओबीसी वर्ग के इर्द-गिर्द केंद्रित है। ऐसे में यूजीसी के नए नियमों को लेकर विपक्ष किसी भी तरह का जोखिम उठाने से बचता नजर आ रहा है।