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पीके ने जेडीयू पर फिर फोड़ा 'ट्वीट बम, नीतीश को 2015 में मिले वोटों की दिलायी याद

PATNA : जेडीयू उपाध्यक्षऔर पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर 'ट्वीट बम' फोड़ा है। प्रशांत किशोर ने जदयू नेतृत्व को 2015 में मिले वोटों की याद दिलाई है। प्रशा

FirstBihar
Anurag Goel
4 मिनट

PATNA : जेडीयू उपाध्यक्षऔर पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर 'ट्वीट बम'  फोड़ा है। प्रशांत किशोर ने जदयू नेतृत्व को 2015 में मिले वोटों की याद दिलाई है। 

प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने से पहले जेडीयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए जिन्होंने 2015 में उन पर विश्वास और भरोसा जताया था। पीके ने आगे लिखा है कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि 2015 की जीत के लिए पार्टी और इसके प्रबंधकों के पास जीत के बहुत रास्ते नहीं बचे थे। 

पार्टी की नसीहतों का भी प्रशांत किशोर पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। पार्टी के बिहार प्रदेश के अध्यक्ष वशिष्ठ नाराय़ण सिंह ने नसीहत देते हुए साफ तौर पर कह दिया है कि पार्टी लाइन से अलग हटकर बोलने वालों के बयान उनके निजी हो सकते हैं, पार्टी का इससे कोई लेना -देना नहीं है। उन्होंने ऐसे नेताओं के बारे में कहा कि पार्टी के निर्णयों पर सवाल उठाने से पहले पार्टी फ़ोरम में गंभीर मुद्दों पर चर्चा होती है और वहां पर ही अपनी बात रखें। अलग से कोई बयान न दें। जेडीयू अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी का स्टैंड साफ  है और हमें कोई डाउट नहीं है।  लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी हम इस बिल का समर्थन करेंगे। जब पार्टी का लाइन है तय तो फिर किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति के अलग स्टैंड का कोई मतलब नहीं है। अधिकृत राय वही है जो लोकसभा में राजीव रंजन सिंह ने रखा। 

प्रशांत किशोर ने नागरिकता संशोधन बिल पर जेडीयू के समर्थन के एलान के साथ ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पीके ने इसके पहले एक और ट्वीट करके तहलका मचा दिया था। पार्टी उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी के इस फैसले को निराशाजनक बताते हुए लिखा था कि नागरिकता संशोधन विधेयक पर जद (यू) के समर्थन से निराशा हुई है। यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करने वाला है, जो भेदभावपूर्ण है। प्रशांत किशोर यहीं नहीं रुके,उन्होंने पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आगे लिखा कि  जद (यू) के द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन पार्टी के संविधान से भी अलग है, जिसमें पहले ही पन्ने पर धर्मनिरपेक्षता शब्द तीन बार लिखा हुआ है।

बता दें कि जेडीयू ने राज्यसभा में बिल का समर्थन किया है। सांसद आरसीपी सिंह ने सदन में बिल के समर्थन में जेडीयू का पक्ष रखा। जद (यू) सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि इस बिल को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है। इस बिल में संविधान का उल्लंघन नहीं हुआ है, ना ही आर्टिकल 14 का उल्लंघन हुआ है। जदयू ने राज्यसभा में इस बिल का समर्थन किया है। जदयू सांसद बोले कि हमारा देश रिपब्लिक है, यहां के नागरिकों को समान अधिकार है।   


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