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विकास वैभव के बाद अब इस IAS अधिकारी ने ट्वीट कर बताया अपना दर्द, बोले .. एक नेमप्लेट में कैसे लिखे सारे विभाग

PATNA : बिहार के प्रशासनिक महाकाव्य में एक से बढ़कर एक आईएएस अधिकारी मौजूद है। जो अपने कामकाज के तरीकों से पूरे देश में खुद और बिहार का नाम ऊंचा करते रहते हैं। इस बीच अब राज्य सरका

विकास वैभव के बाद अब इस IAS अधिकारी ने ट्वीट कर बताया अपना दर्द, बोले .. एक नेमप्लेट में कैसे लिखे सारे विभाग
Tejpratap
Tejpratap
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PATNA : बिहार के प्रशासनिक महाकाव्य में एक से बढ़कर एक आईएएस अधिकारी मौजूद है। जो अपने कामकाज के तरीकों से पूरे देश में खुद और बिहार का नाम ऊंचा करते रहते हैं। इस बीच अब राज्य सरकार में कार्यरत 2011 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल कुमार ने बड़े अनोखे अंदाज में अपनी जिम्मेदारियों को बताया और परेशानियों को भी सबके लाया है।


दरअसल, बिहार में कार्यरत 2011 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल कुमार एक अजीबोगरीब परेशानी सबके सामने बताया है। राहुल कुमार ने अपनी परेशानियों का जिक्र बड़े ही चुटीले अंदाज में किया है। आईएएस राहुल कुमार ने उस नेम प्लेट की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दिलचस्प ट्वीट किया और लिखा, किसी एक जिले में स्थानीय अधिकारियों ने जिन विभागों की जिम्मेदारी मेरे पास है, उन सभी के नाम नेम प्लेट पर लिखने की कोशिश की मगर उसमें फिर भी एक छूट गया. मैं, मिशन डायरेक्टर, स्वच्छ बिहार अभियान के पद पर नियुक्त हूं। 


मालूम हो कि, राज्य सरकार ने राहुल कुमार के ऊपर जिम्मेदारियों का इतना बोझ डाल दिया है कि सभी विभागों के नाम एक साथ एक नेम प्लेट पर आ ही नहीं पा रहे हैं। जिन विभागों की जिम्मेदारी राहुल कुमार को दी गई है, उन विभागों के नाम ही इतने लंबे-लंबे हैं कि एक नेम प्लेट पर सभी विभाग के नाम को लिखना आसान साबित नहीं हो रहा है।


आपको बता दें कि, राहुल कुमार वतर्मान में राज्य सरकार के अंदर 7 विभागों में कार्यरत हैं। इनके पास वर्तमान में बिहार रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी में सीईओ, स्टेट मिशन डायरेक्टर स्टेट रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी, कमिशनर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, कमिशनर मनरेगा, डायरेक्टर जन- जीवन हरयाली, मिशन डायरेक्टर रूरल डेवलपमेंट डिपाटमेंट, मिशन डायरेक्टर लोहिया स्‍वच्‍छ बिहार अभियान की जिम्मेदारी है। 


आपको बताते चलें कि, इससे पहले राहुल कुमार गोपालगंज और पूर्णिया के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं, जहां पर बेहतर काम करके उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसके साथ ही यह दूसरे ऐसे आईपीएस अधिकारी है, जिन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी परेशानी दर्ज कराने के लिए किया है।  वो भी ऐसे समय में जब सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्पष्ट कर दिया है कि अधिकारियों का काम ट्विटर पर ट्वीट करना नहीं है।