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सत्ता बदलते ही आखिर क्यों शुरू हुई क्रेडिट की लड़ाई ? जिसे जदयू बता रही सात निश्चय-2 का प्रण उसे तेजस्वी बता रहे अपना काम, जानिए क्या है इसका पूरा सच

PATNA : बिहार की सत्ता में काबिज महागठबंधन की पार्टी जिस काम को 27 जनवरी 2024 तक किसी भी काम को महागठबंधन सरकार का काम बताती थी वहीं अब 28 जनवरी 2024 से नीतिश कुमार के

सत्ता बदलते ही आखिर क्यों  शुरू हुई क्रेडिट की लड़ाई ? जिसे जदयू बता रही सात निश्चय-2 का प्रण उसे तेजस्वी बता रहे अपना काम, जानिए क्या है इसका पूरा सच
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

PATNA : बिहार की सत्ता में काबिज महागठबंधन की पार्टी जिस काम को 27 जनवरी 2024 तक   किसी भी काम को महागठबंधन सरकार का काम बताती थी वहीं अब 28 जनवरी 2024 से नीतिश कुमार के अलग होते ही तरह-तरह का आरोप लगाकर यह बताने में जुटी हुई है इस 17 महीना के सरकार में उनके तरफ से क्या कुछ किया गया है? तो वही जदयू भी इसका जवाब देने से पीछे नहीं है रही है। ऐसे में सबसे पहले सत्ता से दूर हटते ही मीडिया में यह बयान दिया गया कि काम तो हमने यह किया है। उसके अगले दिन राजधानी के प्रमुख अखबारों में विज्ञापन जारी कर बताया गया की 17 महीना में क्या कुछ किया गया है। ऐसे में इस महागठबंधन से अलग हुई जदयू भी कहां पीछे हटने वाली थी उसके तरफ से भी अखबार में ही पोस्टर जारी कर यह कहा गया कि यह सारी चीज़ें सात निश्चय 2 का हिस्सा है। ऐसे में यह पोस्ट यह विवाद कम होने के बदले बढ़ता ही चला जा रहा है।


तेजस्वी ने इस वजह से बनाया मुद्दा 

बिहार में अब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। नीतीश सरकार में मंत्रियों के विभागों का भी बंटवारा हो चुका है। 12 फरवरी को नीतीश सरकार सदन में विश्वास मत हासिल करेगी। इन सब के बीच अब लड़ाई राजनीतिक बयानबाजी की नहीं बल्कि क्रेडिट की हो गई है। इसकी वजह यह है कि अब बिहार की जनता यह अच्छी तरह समझ गई है की नीतीश कुमार कभी भी किसी भी पार्टी के अपना नाता तोड़ और जोड़ सकते हैं। ऐसे में इन चीजों पर बयानबाजी से कोई फायदा नहीं है लिहाजा यदि जनता के बीच अपनी छवि बरक़रार रखनी है तो अपने कार्यकाल में किए गए कुछ कामों को लेकर ही हो सकता है। बस यही वजह है कि तेजस्वी नीतीश के अलग होते ही इस बात को बड़ा मुद्दा बनाया गया है और इसे भुनाने की कोशिश की जा रही है। 


जनता की ऐसी है सोच 

वहीं, इसको लेकर अब फर्स्ट बिहार ने कुछ युवायों से बातचीत की तो उनका कहना है कि यदि जदयू इसे अपना सात निश्चय योजना - 2 बता रही है तो अच्छी बात है यह हो सकता है।लेकिन,सवाल यह है कि जदयू पिछले 15 सालों से बिहार की सत्ता में काबिज है ऐसे में यदि सही में उसकी यह सोच थी तो उसे इस योजना को पहले से लागू करना चाहिए था इसके लिए तेजस्वी का इंतजार क्यों? यदि यही योजना नीतीश कुमार एनडीए के साथ रहते हुए कर देते हो उसकी चर्चा होती। अभी जब राज्य के अंदर इतनी बड़े पैमाने पर बहाली हुई है तो क्रेडिट को बनता है। राज्य के अंदर तेजस्वी के आने के बाद ही खेल में मैडल लाने के बाद नौकरी देने की चर्चा क्यों हुई ?


भाजपा ने कही थी रोजगार की बात 

जबकि, इस बात को लेकर जब भाजपा के कुछ नेतायों से संपर्क किया जाता है तो उनका कहना है की जब नीतीश कुमार हमारे साथ है तभी इसका रोडमैप तैयार हुआ था। हमने उसी समय कहा था की हमारी एनडीए की सरकार 19 लाख लोगों को रोजगार देगी। इसमें कुछ सरकारी नौकरियां भी शामिल थी और शिक्षकों की बहाली भी थी। लेकिन, जब इस योजना को धरातल पर लाने की बारी आई तो नीतीश कुमार राजद के साथ चले गए इस वजह से यह काम नहीं हो  पाया। 


सात निश्चय -2 का है पार्ट

उधर, इस पूरे मामले को लेकर बिहार की सत्ता में पिछले 15 सालों से मुख्यमंत्री देने वाली पार्टी जदयू से सवाल किया जाता है तो उनका कहना होता है की हमारे नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे में हर तरह का विकास किया है और रोजगार के अवसर भी प्रदान किए हैं। ऐसे में ये जो टीचरों की बहाली वाली बात है यह मुख्यमंत्री की ही सात निश्चय पार्ट- 2 के तहत शामिल किया गया था। इसमें तेजस्वी यादव और राजद का कोई भी योगदान नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से हमारी सोच है। यह महज एक संयोग है और राजनीतिक हालत है की हम उनके साथ थे तो उसी समय लागू हुआ बाकी इसमें उनका कोई योगदान नहीं है। 


बहरहाल, अब देखना यह है कि इस क्रेडिट की राजनीति में आखिरकार जीत किसे हासिल होती है।क्योंकि, सूबे के अंदर अभीजो राजनीतिक हालत है वह इसे तेजस्वी का काम बता तो रही है लेकिन उनके पिता और राजद सुप्रीमों लालू यादव के कार्यकाल को भूल भी नहीं पा रही है। वहीं, दूसरी तरह नीतीश कुमार के बार - बार पाला बदलने से भी उनकी छवि पर असर पड़ा है और रही बात भाजपा की तो यह कभी सत्ता के शीर्ष पर मजबूती से रही नहीं है। लेकिन, इस बार कुछ नया परिवर्तन हुआ है तो जनता को बदलाव की उम्मीद जरूर है। लिहाजा अब भाजपा इस पर कितनी खड़ी उतर पाती है यह उसे तय करना है।