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आनंद मोहन की रिहाई पर जी.कष्णैया की पत्नी और बेटी ने कहा- इससे अधिकारियों का मनोबल टूटेगा, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से करेंगे हस्तक्षेप की मांग

PATNA: गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी, कृष्णैया हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काटने के बाद पूर्व सांसद आनंद मोहन गुरुवार को जेल से रिहा हो गए हालांकि नीतीश सरकार ने जिस तरह से आनन फान

आनंद मोहन की रिहाई पर जी.कष्णैया की पत्नी और बेटी ने कहा- इससे अधिकारियों का मनोबल टूटेगा, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से करेंगे हस्तक्षेप की मांग
Mukesh Srivastava
3 मिनट

PATNA: गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी, कृष्णैया हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काटने के बाद पूर्व सांसद आनंद मोहन गुरुवार को जेल से रिहा हो गए हालांकि नीतीश सरकार ने जिस तरह से आनन फानन में आनंद मोहन की रिहाई कराई है उसपर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। हत्या के दोषी पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर जी. कृष्णैया की पत्नी और उनकी बेटी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के इस फैसले के खिलाफ वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेंगी।


गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने आनंत मोहन की रिहाई पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगी। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार के इस फैसले से अधिकारियों का मनोबल टूटेगा और उन्हें काम करने में मन नहीं लगेगा। आनंद मोहन की रिहाई से जनता में सरकार के प्रति रोष है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर आनंद मोहन चुनाव में खड़ा होते हैं तो कोई भी उन्हें वोट न दे। एक सोची समझी राजनीति के तहत आनंद मोहन को जेल से रिहा किया गया है।


वहीं जी.कृष्णैया की बेटी पद्दमा ने कहा है कि आनंद मोहन की रिहाई उनके लिए काफी दुखद है। नीतीश सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। सरकार के इस फैसले से लोगों के बीच गलत मैसेज जा रहा है। पद्दमा ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी। सरकार का यह फैसला सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अन्याय के समान है।


बता दें कि साल 1994 के पांच दिसंबर को गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। छोटन शुक्ला के शव यात्रा के दौरान उनकी गाड़ी वहां से गुजर रही थी, जिस भीड़ बेकाबू हो गई थी। उस शव यात्रा में आनंद मोहन भी शामिल थे। आरोप है कि आनंद मोहन के उकसाने पर ही भीड़ बेकाबू हुई और जी.कष्णैया की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पटना हाई कोर्ट ने आनंद मोहन को दोषी करार देते हुए साल 2008 में उम्रकैद की सजा सुनाई और अब राजनीतिक लाभ लेने के लिए नीतीश सरकार ने कानून में संसोधन करते हुए पूर्व सांसद आनंद मोहन को जेल से रिहा कर दिया है। 

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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