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पटना का नाम फिर होगा पाटलिपुत्र? संसद में उपेंद्र कुशवाहा ने उठाई बड़ी मांग, जेपी नड्डा का भी किया जिक्र

राज्यसभा में RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई है। उन्होंने इसे बिहार के गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से पहल करने की अपील की।

पटना का नाम फिर होगा पाटलिपुत्र? संसद में उपेंद्र कुशवाहा ने उठाई बड़ी मांग, जेपी नड्डा का भी किया जिक्र
Tejpratap
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6 मिनट

पटना: बिहार की राजधानी पटना को उसके प्राचीन नाम पाटलिपुत्र से दोबारा पहचान दिलाने की मांग अब संसद तक पहुंच गई है। राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सदन में पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र किए जाने की मांग रखी। उन्होंने इसे बिहार के गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से इस दिशा में गंभीरता से पहल करने का आग्रह किया।

उपेंद्र कुशवाहा ने अपने वक्तव्य में कहा कि बिहार का इतिहास भारत के इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। प्राचीन काल में पाटलिपुत्र सत्ता, प्रशासन, शिक्षा और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। उन्होंने कहा कि भारत के स्वर्णिम दौर में देश की राजधानी पाटलिपुत्र हुआ करती थी और यहीं से एक बड़े भूभाग पर शासन संचालित किया जाता था।

कुशवाहा ने कहा कि आज देश के कई शहरों के पुराने नाम वापस किए जा रहे हैं। ऐसे समय में पटना को भी उसके ऐतिहासिक नाम पाटलिपुत्र से पहचान दिलाने पर विचार किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, बिहार के लोगों की भावनाएं भी इस मांग से जुड़ी हुई हैं और पुराने नाम की वापसी से राज्य के लोगों में गौरव की भावना और मजबूत होगी।

पटना के गौरवशाली इतिहास का किया जिक्र

राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने पाटलिपुत्र के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस स्थान को आज पटना के नाम से जाना जाता है, वह प्राचीन भारत में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र था।

उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर रहा है। पाटलिपुत्र ने मौर्य और गुप्त जैसे महत्वपूर्ण साम्राज्यों के दौर में भी केंद्रीय भूमिका निभाई। यही वजह है कि पटना के पुराने नाम को वापस करने की मांग को वह बिहार के गौरव और इतिहास से जोड़कर देख रहे हैं। कुशवाहा ने सदन से अपील की कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाने की मांग की।

जेपी नड्डा के पटना कनेक्शन का भी जिक्र

उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी मांग के दौरान केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पटना से नड्डा का पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। इसलिए बिहार के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी इस चर्चा से उन्हें भी खुशी होगी।

कुशवाहा ने कहा कि जेपी नड्डा ने पटना में काफी समय बिताया है और यहां से उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि पाटलिपुत्र नाम की वापसी की चर्चा उनके लिए भी भावनात्मक रूप से खास हो सकती है।

NDA सरकार के दौर को बताया उपयुक्त समय

RLM प्रमुख ने कहा कि पटना का नाम बदलने के लिए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां भी अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और बिहार दोनों जगह एनडीए की सरकार है। ऐसे में यदि इस दिशा में प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो उसे लागू करने में अपेक्षाकृत आसानी हो सकती है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बिहार के गौरवशाली अतीत को सम्मान देने के लिए इस विषय पर सार्थक पहल की जाए। हालांकि, पटना का नाम बदलने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर निर्धारित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

पाटलिपुत्र नाम का ऐतिहासिक महत्व

पटना को प्राचीन समय में पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। इतिहास में पाटलिपुत्र का उल्लेख एक महत्वपूर्ण नगर और सत्ता के केंद्र के रूप में मिलता है। गंगा के किनारे स्थित होने के कारण भी यह शहर रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा।

मौर्य काल में पाटलिपुत्र ने विशेष प्रसिद्धि हासिल की। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासनकाल में यह विशाल साम्राज्य की राजधानी रहा। बाद के दौर में भी इस क्षेत्र का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व बना रहा।

आज भी पटना में पाटलिपुत्र कॉलोनी जैसे नाम इस शहर के प्राचीन इतिहास की याद दिलाते हैं। इसी ऐतिहासिक पहचान को आधार बनाकर अब पटना का नाम फिर से पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई गई है।

संसद के मानसून सत्र में उठा मुद्दा

उपेंद्र कुशवाहा की यह मांग संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन सामने आई। गुरुवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बार मानसून सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।

इसी दौरान कुशवाहा ने पटना के नाम को लेकर अपनी बात सदन के सामने रखी। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग को लेकर आगे क्या कदम उठाती है और क्या बिहार की राजधानी के प्राचीन नाम पाटलिपुत्र को आधिकारिक रूप से वापस लाने की दिशा में कोई प्रक्रिया शुरू होती है। फिलहाल, राज्यसभा में उठी इस मांग ने बिहार की ऐतिहासिक पहचान और पटना के पुराने नाम को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।