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JDU-BJP के करीब एक दर्जन MLA-MLC को सरकारी तोहफा: राज्यमंत्री के माफिक सुख-सुविधा देने का फैसला

PATNA: बिहार का सरकारी खजाना एक बार फिर सत्तारूढ़ विधायकों और विधान पार्षदों के लिए खुला है. जेडीयू-बीजेपी के करीब एक दर्जन ऐसे विधायकों और विधान पार्षदों को राज्यमंत्री की तर

JDU-BJP के करीब एक दर्जन MLA-MLC को सरकारी तोहफा: राज्यमंत्री के माफिक सुख-सुविधा देने का फैसला
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: बिहार का सरकारी खजाना एक बार फिर सत्तारूढ़ विधायकों और विधान पार्षदों के लिए खुला है. जेडीयू-बीजेपी के करीब एक दर्जन ऐसे विधायकों और विधान पार्षदों को राज्यमंत्री की तरह सुख-सुविधा देने का फैसला लिया गया है, जो मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है. बिहार सरकार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं रहने वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के 17 माननीयों को कैबिनेट मंत्री से लेकर राज्यमंत्री का दर्जा देकर मंत्रियों की माफिक वेतन-भत्ता दे रही है.


कैबिनेट का फैसला

दरअसल मंगलवार को हुई नीतीश कैबिनेट की बैठक में बिहार विधानसभा और विधान परिषद में सत्तारूढ़ गठबंधन के सचेतकों को राज्यमंत्री की तरह वेतन, भत्ता और सुख-सुविधा देने का फैसला लिया है. सत्तारूढ़ गठबंधन के सचेतकों को मंत्री की तरह सुख-सुविधा देने की परंपरा नीतीश कुमार ने ही शुरू की थी. पहले उन्हें उप मंत्री का दर्जा दिया जाता था,ऐसे में उन्हें सुख-सुविधा थोड़ा कम मिलता था. आज उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया गया.


इन विधायकों की बल्ले-बल्ले

अब उन विधायकों का नाम जानिये, जिन्हें कैबिनेट के फैसले से लाभ हो रहा है. बिहार विधानसभा में जेडीयू-बीजेपी ने सत्तारूढ़ गठबंधन के 9 विधायकों को सचेतक नियुक्त कर रखा है. सिकटी के विधायक विजय कुमार मंडल, सहरसा के विधायक आलोक रंजन, बनमनखी के विधायक कृष्ण कुमार ऋषि, बिस्फी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल, दरभंगा के विधायक संजय सरावगी, वजीरगंज के विधायक बीरेंद्र सिंह, मटिहानी के विधायक राजकुमार सिंह, हरलाखी के विधायक सुधांशु शेखर और गोपालपुर के बहुचर्चित विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के सचेतक हैं. 


वहीं, सत्तारूढ गठबंधन ने बिहार विधान परिषद में भी दो सचेतकों की नियुक्ति कर रखी है. नीरज कुमार और रीना यादव सत्तारूढ़ गठबंधन के सचेतक हैं. इन सारे विधायको और विधान पार्षदों को पहले उप मंत्री का दर्जा दिया गया था. आज कैबिनेट की बैठक में उन्हें राज्य मंत्री की तरह सुख सुविधा देने का फैसला लिया गया.


क्या होगा फायदा?

राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद इन सारे विधायकों और विधान पार्षदों का वेतन भत्ता बढ़ जायेगा. यात्रा के लिए सुविधा बढ़ेंगी. वे कई निजी लोगों को अपना कर्मचारी नियुक्त कर पायेंगे, जिन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह सरकार से वेतन मिलेगा. एक मंत्री को ऐसे पांच निजी कर्मचारी रखने का अधिकार है.


17 विधायकों-विधान पार्षदों को मंत्री  

वैसे बिहार विधान सभा औऱ विधान परिषद में राज्य सरकार ने कुल 17 नेताओं को उप नेता, मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक और सचेतक बना कर मंत्री का दर्जा दे रखा है. विधानसभा में बीजेपी के जनक सिंह उप मुख्य सचेतक हैं, उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा हासिल है. विधान परिषद में जेडीयू के संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी मुख्य सचेतक हैं. वहीं, बीजेपी के राजेंद्र गुप्ता और ललन सर्राफ उप नेता हैं. तीनों को कैबिनेट मंत्री की सुविधा हासिल है. विधान परिषद में ही बीजेपी के संजय मयूख उप मुख्य सचेतक हैं औऱ उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा हासिल है.