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शराबबंदी पर NDA में मतभेद! मांझी को दिलीप जायसवाल ने दिया करारा जवाब, कहा..“पैसा कमाने के लिए क्या कोई कोठे पर चला जाएगा?

बिहार में शराबबंदी को लेकर एनडीए नेताओं के बीच मतभेद सामने आ गए हैं। मंत्री दिलीप जायसवाल ने जीतन राम मांझी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि शराबबंदी हटाने की मांग शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी कर रहे हैं।

बिहार न्यूज
शराबबंदी पर सवाल
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर एनडीए के नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने शराबबंदी के पक्ष में जोरदार बयान देते हुए कहा कि इसे खत्म करने की मांग शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी कर रहे हैं।


दिलीप जायसवाल ने कहा कि शराबबंदी हटाने के लिए शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी लोग बेहद बेचैन हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में सूखे नशे (ड्रग्स) की लत को लेकर जो रिपोर्ट पेश की जा रही है, उसके आधार पर शराबबंदी पर सवाल उठाना गलत है।


उन्होंने कहा कि बिहार पूरे देश में इस मामले में काफी नीचे है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों में 5 से 6 प्रतिशत आबादी सूखे नशे की चपेट में है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 1 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि जहां शराब खुलेआम बिक रही है, वहां बिहार की तुलना में कई गुना अधिक लोग नशे का सेवन कर रहे हैं।


मंत्री ने कहा कि यह कहना गलत है कि शराबबंदी के कारण लोग सूखे नशे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बातें जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए शराबबंदी खत्म करने की दलील देना उचित नहीं है।


दिलीप जायसवाल ने कहा, “पैसा कमाने के लिए क्या कोई कोठे पर चला जाएगा? शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। समाज में नशामुक्ति और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। मानवता बेचकर कमाए गए पैसे से विकास संभव नहीं है।”


उन्होंने दो टूक कहा कि कुछ शराब प्रेमी और शराब माफिया चाहते हैं कि बिहार में शराबबंदी खत्म हो जाए, लेकिन सरकार समाजहित में इस कानून के प्रति प्रतिबद्ध है।