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गिरिराज जैसे नेताओं का होना चाहिए विरोध, बोले पप्पू यादव..बिन पेंदी के लोटा हैं अशोक चौधरी

PATNA: बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री व सांसद गिरिराज सिंह पर हुए हमले और भूमिहार समाज पर टिप्पणी करने वाले नीतीश के मंत्री अशोक चौधरी को लेकर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बड़ा बय

गिरिराज जैसे नेताओं का होना चाहिए विरोध, बोले पप्पू यादव..बिन पेंदी के लोटा हैं अशोक चौधरी
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री व सांसद गिरिराज सिंह पर हुए हमले और भूमिहार समाज पर टिप्पणी करने वाले नीतीश के मंत्री अशोक चौधरी को लेकर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बड़ा बयान दिया है। पप्पू यादव ने कहा है कि गिरिराज सिंह जैसी मानसिकता के नेताओं का जमकर विरोध होना चाहिए पर हिंसात्मक प्रतिरोध ठीक नहीं है। 


पप्पू यादव ने आगे कहा कि हालांकि, गिरिराज सिंह जैसे नेतागण सिर्फ़ ज़ुबानी विषवमन कर हर दिन हिंसा को बढ़ावा देते हैं, आज जो उनके साथ हुआ उसके ज़िम्मेदार वह ख़ुद हैं! उन्हें खुद दिल से पश्चाताप करना चाहिए! दरअसल बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह पर शनिवार को हमला किया गया। उनकी खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। हमलावर वार्ड पार्षद  सैफी को मौके से पुलिस ने पकड़ लिया जिससे पूछताछ की गयी। बलिया ब्लॉक में सांसद गिरिराज सिंह ने जनता दरबार लगाया था। जनता दरबार से निकलने के दौरान उन पर हमला किया गया। मुर्दाबाद के नारे लगाए गये। गिरिराज सिंह पर हमले के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मी काफी मशक्कत के बाद उन्हें भीड़ से निकालकर बाहर ले गये। 


इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जनता दरबार खत्म होने के बाद जब वो गाड़ी की तरफ जा रहे थे तब मेरे साथ गलत व्यवहार किया गया। दुर्भाग्य यह है कि जिसने उन पर हमला किया उसे दाढ़ी है। दाढ़ी होने के कारण राहुल-अखिलेश और तेजस्वी यादव उसके तरफ से खड़े हो गये है लेकिन गिरिराज सिंह ऐसी चीजों से डरने वाला व्यक्ति नहीं है। जो भी साम्प्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ना चाहेगा उसके खिलाफ हमारी आवाज इसी तरह उठेगी।  


वही नीतीश कुमार के किचन कैबिनेट के सदस्य माने जाने वाले मंत्री अशोक चौधरी जहानाबाद में जेडीयू के कार्यालय का उद्घाटन करने गये जब गये थे तब उन्होंने भूमिहारों को कोसना शुरू कर दिया था। अशोक चौधरी ने मंच से कहना शुरू किया कि क्या नीतीश कुमार ने भूमिहारों के लिए काम नहीं किया है. फिर भूमिहारों ने क्यों लोकसभा चुनाव में नीतीश को वोट नहीं दिया.


अशोक चौधरी ने कहा था कि “नीतीश कुमार जब अति पिछड़ा को उम्मीदवार बनाते हैं तो भूमिहार लोग भाग जाते हैं. क्यों नहीं दीजियेगा वोट, काम तो आपके यहां भी नीतीश कुमार ने किया है.  लोकसभा चुनाव में एक-दो नेताओं को छोड़ कर मैंने किसी भूमिहार को नहीं देखा कि वह जेडीयू के लिए वोट मांग रहा है. हम लोग जब दरवाजे-दरवाजे घूमते थे तो भूमिहार कहते थे कि जेडीयू के उम्मीदवार को वोट नहीं देंगे.”अशोक चौधरी लगातार बोलते रहे-“ आपका उम्मीदवार भूमिहार होगा, चार-चार बार जीतेगा और काम नहीं करेगा तब भी कहियेगा कि वह बढिया है. मेरा उम्मीदवार तीन-चार दिन आपके घर नहीं गया तो कहियेगा कि वोट नहीं देंगे. ऐसे कैसे चलेगा.”


वही भूमिहार समाज को लेकर बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी के बयान पर पलटवार करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि राज्य सरकार में एक मंत्री बिन पेंदी के लोटा हैं। सब दिन परजीवी रहे, पीठ में छूरा घोंपने का चरित्र रहा है। किसी जाति पर ओछी टिप्पणी का हक़ कैसे है? भूमिहार जाति की बात होगी तो उसकी पहचान स्वामी सहजानंद, दिनकर जी, श्रीबाबू से होगी। किसी नेता के विरोध के कारण क्या वो किसी जाति को कलंकित करेंगे?