ब्रेकिंग
दवा दुकान का शटर तोड़ लाखों की चोरी, नकदी और दवाएं ले उड़े चोर; CCTV में कैद हुई पूरी वारदातबिहार में खुलेगा NSD का नया कैंपस, केंद्र सरकार से मिली मंजूरी; युवा कलाकारों को मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंगKYP सेंटर बंद करने के फैसले पर पटना में बवाल: JDU दफ्तर के बाहर प्रदर्शन, भाजपा के मंत्री के खिलाफ और नीतीश के समर्थन में लगे नारे टपकती छत... जमीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे, न बेंच-डेस्क न शौचालय; झोपड़ी में चल रहा सरकारी स्कूलफ्लड फाइटिंग के काम के दौरान गंगा में पलटी मजदूरों से भरी नाव, 11 लोग थे सवारदवा दुकान का शटर तोड़ लाखों की चोरी, नकदी और दवाएं ले उड़े चोर; CCTV में कैद हुई पूरी वारदातबिहार में खुलेगा NSD का नया कैंपस, केंद्र सरकार से मिली मंजूरी; युवा कलाकारों को मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंगKYP सेंटर बंद करने के फैसले पर पटना में बवाल: JDU दफ्तर के बाहर प्रदर्शन, भाजपा के मंत्री के खिलाफ और नीतीश के समर्थन में लगे नारे टपकती छत... जमीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे, न बेंच-डेस्क न शौचालय; झोपड़ी में चल रहा सरकारी स्कूलफ्लड फाइटिंग के काम के दौरान गंगा में पलटी मजदूरों से भरी नाव, 11 लोग थे सवार

‘अब ज्ञान बहुत हो गया, गरीबों को उनका हक और हिस्सा चाहिए’, दीपा मांझी का रोहिणी आचार्य पर पलटवार

Bihar Politics: बिहार में आरक्षण के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इमामगंज विधायक दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य के बयान पर पलटवार करते हुए आरक्षण में कोटा और वंचित वर्गों को उनका हक व हिस्सेदारी देने की मांग उठाई।

Bihar Politics
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों आरक्षण का मुद्दा गरम है। आरक्षण में आरक्षण की मांग कर रहे जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन के बाद मांझी का बहू दीपा मांझी भी मैदान में उतर गई हैं। इमामगंज से विधायक दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य पर पलटवार किया है। रोहिणी आचार्य ने कहा था कि जब तक सामाजिक-आर्थिक गैर बराबरी कायम है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था की किसी प्रकार की समीक्षा उचित नहीं है।



दीपा मांझी ने एक्स पर लिखा, “सिंगापुर की शाही जिंदगी जीने वालों से ज्ञान नहीं चाहिए, गरीबों को उनका हक और हिस्सा चाहिए:- दीपा मांझी विधायक, इमामगंज।


हम गरीबों और वंचितों की बात कर रहे हैं, इसलिए मुद्दे से भटकने के बजाय हमारे सवालों का जवाब दीजिए। सिंगापुर की शाही जिंदगी और हजारों करोड़ की कथित संपत्ति के बीच बैठकर आरक्षण और सामाजिक न्याय पर ज्ञान देना आसान है, लेकिन उस गरीब के दर्द को महसूस करना मुश्किल है, जिसके बच्चों को आजादी के 80 साल बाद भी दो वक्त का भोजन, दवाई, अच्छी पढ़ाई और सिर के ऊपर छत तक नसीब नहीं है। जिसने गरीबी और अभाव को सिर्फ भाषणों और किताबों में देखा हो, उसके लिए उस परिवार की पीड़ा समझना सचमुच मुश्किल है, जो रोज रोटी, इलाज और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।



इसलिए हमें ज्ञान नहीं चाहिए, हक चाहिए। उपदेश नहीं चाहिए, हिस्सा चाहिए। भावनाएं नहीं, हिसाब चाहिए। आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक वंचना के खिलाफ मिला संवैधानिक अधिकार है। अगर 80 साल बाद भी समाज के अनेक वर्ग शिक्षा, नौकरी और प्रतिनिधित्व में पीछे खड़े हैं, तो यह पूछना हमारा अधिकार है कि आरक्षण का लाभ आखिर किन लोगों तक पहुंचा और जो आज भी सबसे पीछे हैं, उन्हें उनका हिस्सा कब मिलेगा? हम किसी का हक छीनने की बात नहीं कर रहे हैं। हम तो कह रहे हैं—जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। हम तो अपने कोटे में कोटा माँग रहे हैं। जो सबसे वंचित है, उसे भी अवसर और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।



और माफियाओं के सरदार और सरदारनी, अगर जवाब है तो सवालों का जवाब दीजिए—ज्ञान मत दीजिए। गरीब की एमबीबीएस की सीट खाकर फिर उसी गरीब को सामाजिक न्याय का पाठ पढ़ाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।  पशुओं का चारा   खाकर जिनका लालन पालन हुआ हो उनसे यह उम्मीद करना भी बेवकूफी है कि वे आज सबसे वंचितों के हिस्से की लड़ाई में ईमानदारी से साथ खड़े होंगे। फिर भी सवाल व्यक्ति का नहीं, व्यवस्था का है। सवाल है—गरीब का हिस्सा कौन दिलाएगा? जिनका प्रतिनिधित्व आज भी नगण्य है, उनका हक कौन सुनिश्चित करेगा?


अब ज्ञान बहुत हो गया।

अब आंकड़ों पर जवाब चाहिए।

अब गरीब का हक चाहिए।

अब वंचितों का हिस्सा चाहिए।

और सबसे बढ़कर—हिसाब चाहिए।


आरक्षण रहेगा, लेकिन उसका लाभ सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचेगा।

जिसकी जितनी भागीदारी—उसकी उतनी हिस्सेदारी।”

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता