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गपशप: 'कप्तान' और 'भाई साहब' के बीच चरम पर टकराव...दल के अंदर खूब हो रही चर्चा, बड़ा कौन...?

Bihar News: आज चर्चा करेंगे एक राजनैतिक पार्टी के कप्तान और भाई साहब की. इन दिनों दल के अंदर दोनों के बीच की रस्साकस्सी की खूब चर्चा हो रही है. यह गपशप न सिर्फ दल के अंदर है,

गपशप: 'कप्तान' और 'भाई साहब' के बीच चरम पर टकराव...दल के अंदर खूब हो रही चर्चा, बड़ा कौन...?
Viveka Nand
3 मिनट

Bihar News: आज चर्चा करेंगे एक राजनैतिक पार्टी के कप्तान और भाई साहब की. इन दिनों दल के अंदर दोनों के बीच की रस्साकस्सी की खूब चर्चा हो रही है. यह गपशप न सिर्फ दल के अंदर है, बल्कि बाहर भी होने लगी है. दरअसल, इस तरह के टकराव पहले भी होते थे, लेकिन बात बाहर नहीं आती थी. इस बार विवाद सतह पर आ गई है. भाई साहब के हस्तक्षेप से कप्तान साहब परेशान हैं. परेशान हों भी क्यों नहीं....जिसे नहीं चाह रहे, उसे थोप दे रहे.

कप्तान जिसे नहीं चाह रहे, भाई साहब आगे कर दे रहे...

बात उस पार्टी की करेंगे, जो अनुशासित मानी जाती है, जो खुद को सबसे अलग बताती है. कुछ मामलों में अलग है भी. पार्टी में कप्तान तो होते ही हैं, भाई साहब भी होते हैं. हालांकि वे पर्दे के पीछे से काम करते हैं. यह व्यवस्था लंबे समय से लागू है. इधऱ, बिहार यूनिट में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा. हितों का टकराव चरम पर है. बताया जाता है कि पार्टी के अंदर कई गुट हो गए हैं. ऐसे में कामकाज पर भी प्रभाव पड़ रहा. कप्तान जिसे नहीं चाह रहे, उसे भाई साहब आगे बढ़ा दे रहे. एक नेता को बार-बार और हर जगह आगे बढ़ाने से कप्तान साहब परेशान हैं. कई बार अपना दर्द भी सार्वजनिक किया है. यह बताने की कोशिश की है कि, पार्टी में कप्तान की राय से ही निर्णय लिया जाय  इसके बाद भी भाई साहब पर कोई असर नहीं पड़ रहा. 

बिना गुट वाले नेताओं को समझ में नहीं आ रहा...किधऱ जाएं  

पार्टी के अंदर खींचातानी का असर दल पर भी पड़ रहा है. बताया जाता है कि कई नेता कप्तान साहब के पक्ष में हैं तो कई भाई साहब के पक्ष में. तीसरा धड़ा भी है जो बड़े नेता के साथ खड़ा है. ऐसे में बिना गुट वाले नेताओं को परेशानी हो रही है. वे किधऱ रहें, समझ में नहीं आ रहा. अब देखना होगा कप्तान साहब और भाई साहब के बीच का यह टकराव कब खत्म होता है ? 

विवेकानंद की रिपोर्ट