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बिहार में खत्म होगा शराबबंदी कानून? सीएम सम्राट चौधरी से मिले RML विधायक माधव आनंद, कहा- इसकी जरूरत नहीं

Bihar Politics: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सियासत तेज हो गई है। आरएलएम विधायक माधव आनंद ने कानून की समीक्षा कर इसे समाप्त करने की मांग की है।

Bihar Politics
शराबबंदी खत्म करने की मांग
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार बनने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य की राजनीति में शराबबंदी कानून को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसकी समीक्षा कर इसे समाप्त करने की मांग की है।


गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद माधव आनंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और उन्हें विश्वास है कि बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। माधव आनंद ने कहा कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार की एक ऐतिहासिक पहल थी, लेकिन अब 10 साल बाद इसकी समीक्षा जरूरी है। उनके अनुसार, यह कानून राज्य के लिए राजस्व नुकसान का कारण बन रहा है और इसे जारी रखने के बजाय जागरूकता पर जोर दिया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा कि बिहार को विकास के लिए फंड की जरूरत है, लेकिन शराबबंदी के कारण राजस्व दूसरे राज्यों में जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सदन में पहले भी उन्होंने इस कानून की समीक्षा की मांग उठाई थी और अब भी वे इसे जरूरी मानते हैं।


विधायक ने कहा कि शराबबंदी समाधान नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना ज्यादा प्रभावी तरीका होगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विकास और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार विकास की नई दिशा में आगे बढ़ेगा और ‘विकसित बिहार’ तथा ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य पूरा होगा।


बता दें कि बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान बड़ी मात्रा में शराब जब्त की गई और लाखों लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन जहरीली शराब से हुई मौतों और अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क को लेकर यह कानून लगातार चर्चा में रहा है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता