Bihar Politics: बिहार में पूर्व आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा की जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात के बाद उनके राजनीति में आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, काम्या मिश्रा या पार्टी की ओर से अभी तक राजनीति में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. संजय झा ने इस मुलाकात को दिवाली की शुभकामनाओं से जुड़ी शिष्टाचार भेंट बताया है. इसके बावजूद मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या काम्या मिश्रा भी अब खाकी छोड़कर सियासत की राह पकड़ने जा रही हैं.
वर्ष 2019 बैच की बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी रहीं काम्या मिश्रा ने दरभंगा ग्रामीण एसपी के पद पर रहते हुए अपनी अलग पहचान बनाई थी. इसी दौरान उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी जाना जाने लगा. अगस्त 2024 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे मार्च 2025 में मंजूरी मिली. अब 6 नवंबर 2026 को पटना में संजय झा से उनकी मुलाकात ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है.
वैसे बिहार में यह पहली बार नहीं है, जब किसी आईपीएस अधिकारी ने पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना हो. इससे पहले भी कई अधिकारी खाकी वर्दी उतारकर चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. इनमें कुछ विधायक और मंत्री बने, तो कुछ को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. कई अधिकारियों ने अपनी पार्टी भी बनाई, लेकिन उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिली.
सुनील कुमार: आईपीएस से बने बिहार के शिक्षा मंत्री
पुलिस सेवा से राजनीति में सफल होने वाले अधिकारियों में सुनील कुमार का नाम प्रमुख है. वे 1987 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने पटना एसएसपी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और डीजी स्तर तक पहुंचे.
रिटायरमेंट के बाद उन्होंने जेडीयू का दामन थाम लिया. वर्ष 2020 में भोरे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद उन्हें बिहार का शिक्षा मंत्री बनाया गया. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की. इस तरह सुनील कुमार ने पुलिस सेवा के बाद राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई.
आनंद मिश्रा: एनकाउंटर स्पेशलिस्ट से विधायक तक का सफर
आनंद मिश्रा भी उन पूर्व आईपीएस अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा. वे 2011 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. पुलिस सेवा के दौरान उनकी पहचान सख्त अधिकारी के रूप में बनी.
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बक्सर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. इसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें बक्सर से उम्मीदवार बनाया. इस बार उन्होंने 28 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और विधायक बने.
शिवदीप लांडे: अपनी पार्टी बनाई, लेकिन चुनाव में हार मिली
बिहार में शिवदीप लांडे की पहचान एक चर्चित पुलिस अधिकारी के रूप में रही है. 2006 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे लांडे को लोग ‘सिंघम’ और ‘सुपरकॉप’ के नाम से भी जानते हैं.
सितंबर 2024 में उन्होंने वीआरएस लिया. इसके बाद अप्रैल 2025 में अपनी पार्टी ‘हिंद सेना’ बनाई. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जमालपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. चुनाव में वे तीसरे स्थान पर रहे. पुलिस सेवा के दौरान उनकी लोकप्रियता काफी चर्चा में रही, लेकिन इसका फायदा उन्हें चुनाव में नहीं मिल सका.
गुप्तेश्वर पांडेय: डीजीपी की कुर्सी छोड़ जेडीयू में हुए शामिल
बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय भी राजनीति में आने को लेकर काफी चर्चा में रहे. वे 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी थे. डीजीपी रहते हुए वे कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे.
वर्ष 2020 में उन्होंने वीआरएस लेकर जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर ली. उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी की ओर से टिकट नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बना ली और अध्यात्म की ओर रुख कर लिया.
राकेश कुमार मिश्रा: जन सुराज के टिकट पर लड़ा चुनाव
1986 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश कुमार मिश्रा भी पुलिस सेवा से राजनीति में आए. अपने कार्यकाल में वे एडीजी और डीजी स्तर तक पहुंचे. आईआईटी बीएचयू के गोल्ड मेडलिस्ट रहे मिश्रा ने बाद में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का दामन थाम लिया.
वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दरभंगा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके. उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा.
जय प्रकाश सिंह: हिमाचल में नौकरी, बिहार में चुनावी किस्मत आजमाई
जय प्रकाश सिंह 2000 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. वे हिमाचल प्रदेश कैडर में एडीजी के पद तक पहुंचे थे. बाद में वीआरएस लेकर जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए.
बिहार के मूल निवासी जय प्रकाश सिंह ने वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में छपरा सीट से अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली.
बीके रवि: कांग्रेस के टिकट पर रोसड़ा से लड़े चुनाव
ब्रज किशोर रवि यानी बीके रवि तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी रह चुके हैं. उनका संबंध बिहार के समस्तीपुर जिले से है. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें रोसड़ा सीट से उम्मीदवार बनाया था. चुनाव में उन्हें करीब 70 हजार वोट मिले, लेकिन वे दूसरे स्थान पर रह गए और जीत से चूक गए.
डीपी ओझा: शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई से मिली पहचान
बिहार के पूर्व डीजीपी डीपी ओझा भी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके थे. वे 1967 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे थे. पुलिस सेवा के दौरान सीवान के बाहुबली सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर उनकी पहचान बनी थी.
वर्ष 2004 में उन्होंने बेगूसराय से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. अब उनका निधन हो चुका है.
आशीष रंजन सिन्हा: डीजीपी पद के बाद कांग्रेस और राजद में रहे
बिहार के पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा ने भी रिटायरमेंट के बाद राजनीति में कदम रखा. शुरुआत में वे राजद में शामिल हुए और बाद में कांग्रेस का हिस्सा बने. वर्ष 2014 में उन्होंने नालंदा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके.
उन्होंने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के साथ-साथ नीतीश कुमार के शासनकाल में भी डीजीपी की जिम्मेदारी संभाली थी.
निखिल कुमार और ललित विजय सिंह को मिली राजनीतिक सफलता
बिहार के पूर्व आईपीएस अधिकारियों में निखिल कुमार और ललित विजय सिंह ऐसे नाम हैं, जिन्होंने राजनीति में भी अच्छी सफलता हासिल की.
निखिल कुमार दिल्ली पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं. बाद में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर औरंगाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद उन्हें राज्यपाल की जिम्मेदारी भी मिली.
वहीं, ललित विजय सिंह भी पुलिस सेवा से राजनीति में आए थे. वे बेगूसराय से सांसद चुने गए और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बने.
2025 के चुनाव में कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने आजमाई किस्मत
वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी पूर्व आईपीएस अधिकारियों का सियासी मैदान में उतरने का सिलसिला देखने को मिला. कम से कम छह पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने अलग-अलग पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. इनमें सुनील कुमार और आनंद मिश्रा ही जीत दर्ज कर सके, जबकि बाकी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा.
अब काम्या मिश्रा की संजय झा से मुलाकात के बाद एक बार फिर बिहार की राजनीति में पूर्व आईपीएस अधिकारियों की एंट्री को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, फिलहाल उनके राजनीति में आने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे में देखना होगा कि ‘लेडी सिंघम’ आगे राजनीति का रास्ता चुनती हैं या फिर अपनी अलग राह पर ही चलती हैं.





