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BJP में खूब हुआ भितरघात का खेल, बेगूसराय में रजनीश को अपनों ने हरवा दिया

PATNA : विधान परिषद के चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे जबरदस्त सियासी खेल का खुलासा हो रहा है। बेगूसराय में बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व एमएलसी रजनीश कुमार की हार त

BJP में खूब हुआ भितरघात का खेल, बेगूसराय में रजनीश को अपनों ने हरवा दिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA : विधान परिषद के चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे जबरदस्त सियासी खेल का खुलासा हो रहा है। बेगूसराय में बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व एमएलसी रजनीश कुमार की हार तय हो गई है। रजनीश कुमार कांग्रेस के राजीव सिंह से पिछड़ चुके हैं पहली वरीयता के मामले में रजनीश कुमार को बढ़त नहीं मिल पाई और दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में भी खबर लिखे जाने तक कांग्रेस के राजीव सिंह आगे थे।


बेगूसराय में रजनीश कुमार आज जिस हालात में पहुंचे हैं उसके पीछे सबसे बड़ी वजह भितरघात मानी जा रही है। कांग्रेस का पल्ला बिहार में इकलौती सीट पर भारी हो गया। बेगूसराय में भारतीय जनता पार्टी के अंदर जबरदस्त अंदरूनी मारकाट देखने को मिली है। विधान परिषद चुनाव की घोषणा के पहले ही यह तय हो गया था कि बेगूसराय में भितरघात का खेल जमकर खेला जाएगा।


दरअसल स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और रजनीश कुमार के रिश्तो में खटास के बारे में सबको मालूम है। गिरिराज सिंह को जब लोकसभा चुनाव के दौरान नवादा से बेगूसराय शिफ्ट किया गया था और अपना सीट बदले जाने से गिरिराज नाराज हो गए थे तब रजनीश कुमार ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर सोशल मीडिया के जरिए नसीहत दी थी।


बाद में गिरिराज सिंह ने अपना फैसला बदला था और वह बेगूसराय से चुनाव लड़े भी और जीत भी हासिल की। केंद्र में उनका कद भी बढ़ा। केंद्रीय मंत्री के तौर पर वे मोदी कैबिनेट में शामिल हो गये लेकिन गिरिराज रजनीश की तरफ से दी गई नसीहत को शायद ही कभी भूले हो। इसके बाद गिरिराज सिंह ने बेगूसराय में धीरे-धीरे पकड़ मजबूत करनी शुरू की। विधानसभा चुनाव में गिरिराज केवल एक उम्मीदवार के लिए एक टिकट पर अड़े तो बेगूसराय में कुंदन सिंह के टिकट के लिए उन्होंने कुंदन सिंह को टिकट दिलवाया कुंदन सिंह चुनाव भी जीत गए।


लेकिन विधान परिषद में असल खेल शुरू हुआ जेडीयू विधायक डॉ संजीव कुमार को लेकर संजीव कुमार परबत्ता से जेडीयू के विधायक हैं और वह पूर्व मंत्री RN सिंह के बेटे हैं। संजीव ने पिछला विधान परिषद का चुनाव रजनीश कुमार के खिलाफ लड़ा था। तब नीतीश एनडीए में नहीं थे महागठबंधन के कैंडिडेट होने के बावजूद डॉक्टर संजीव रजनीश के हाथों चुनाव में हार गए थे। इस बार नीतीश भी एनडीए में शामिल है ऐसे में जेडीयू विधायक ने अपने भाई राजीव सिंह को कांग्रेस में सेट कर दिया। राजीव सिंह को कांग्रेस का टिकट मिला तो जेडीयू विधायक ने बीजेपी के उन विधायकों के साथ मिलकर जिले में गोलबंदी कर दी जो विधायक रजनीश से नाराज थे।


सियासी जानकार मानते हैं कि इस पूरे खेल के पीछे कहीं न कहीं स्थानीय सांसद की सहमति रही। हालांकि इसका कोई पक्का सबूत नहीं मिलता लेकिन फिर भी उनके करीबी और बीजेपी विधायक कुंदन सिंह के साथ-साथ जिले के अन्य एनडीए विधायकों के साथ डॉक्टर संजीव लगातार मीटिंग करते रहे रणनीति बनती रही। राजीव सिंह को जीत दिलाने कि एनडीए के विधायकों ने एनडीए उम्मीदवार रजनीश कुमार की बजाय कांग्रेस उम्मीदवार राजीव सिंह के जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया और अब हालात ऐसे हो गए कि बीजेपी उम्मीदवार यहां भितरघात की वजह से पिछड़ गए।

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