ब्रेकिंग
पुलिस हेडक्वार्टर के सामने युवक की लाश मिलने से सनसनी, शव की पहचान करने में जुटी पुलिस धान खरीद में अनियमितता को लेकर EOU की जांच तेज, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंपहोम्योपैथिक क्लिनिक की आड़ में चल रहा था अवैध स्प्रिट का काला खेल, उत्पाद विभाग संचालक को किया गिरफ्तारखराब सड़क-पुल पर ठेकेदारों की खैर नहीं, 82 अधिकारियों की टीम करेगी जांचKISHANGANJ: ठाकुरगंज में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: 4.04 लाख की निकासी पर घमासान, कागजों पर बनी सड़क, जमीन पर गायबपुलिस हेडक्वार्टर के सामने युवक की लाश मिलने से सनसनी, शव की पहचान करने में जुटी पुलिस धान खरीद में अनियमितता को लेकर EOU की जांच तेज, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंपहोम्योपैथिक क्लिनिक की आड़ में चल रहा था अवैध स्प्रिट का काला खेल, उत्पाद विभाग संचालक को किया गिरफ्तारखराब सड़क-पुल पर ठेकेदारों की खैर नहीं, 82 अधिकारियों की टीम करेगी जांचKISHANGANJ: ठाकुरगंज में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: 4.04 लाख की निकासी पर घमासान, कागजों पर बनी सड़क, जमीन पर गायब

नदी में नाव खेते दिखे सांसद प्रदीप कुमार सिंह, नजारा देख हैरत में पड़ गए लोग

ARARIA : अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह आज एक अलग ही रूप देखने को मिला। पिपरा बिजवार से रतवा नदी को पार करने के दौरान उन्होंने नाव की पतवार खुद थाम ली और नदी पार कर गए। दरअसल, सांस

नदी में नाव खेते दिखे सांसद प्रदीप कुमार सिंह, नजारा देख हैरत में पड़ गए लोग
Mukesh Srivastava
2 मिनट

ARARIA : अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह आज एक अलग ही रूप देखने को मिला। पिपरा बिजवार से रतवा नदी को पार करने के दौरान उन्होंने नाव की पतवार खुद थाम ली और नदी पार कर गए। दरअसल, सांसद प्रदीप कुमार सिंह पलासी के छपनिया गांव में एक शोक संतप्त परिवार से मिलने के लिए जा रहे थे। सांसद को रतवा नदी पार कर छपनिया गांव पहुंचना था। नदी के किनारे नाव तो मौजूद थी लेकिन नाविक नहीं था। नाविक पहुंचा ही था कि सांसद ने खुद अपने हाथ में पतवार लेकर नाव खेना शुरू कर दिया।


इस दौरान बांस का पतवार सांसद ने खुद थाम लिया और नाव को नदी पार कराने की जुगत में लग गये। बार-बार नाविक सांसद से नाव को उसे खेने देने की मांग कर रहे थे, लेकिन सांसद ने उसे बैठा दिया और खुद ही नाव को खेते हुए नदी को पार कर गए। सांसद के साथ नाव पर उसके अंगरक्षक समेत अन्य लोग मौजूद थे। एक सांसद को नाव खेता देख लोग हैरान हो गए।


उन्होंने बताया कि उनका बचपन नदी के किनारे गांव में बिता है। जहां वे बचपन मे खेल-खेल में नाव को पतवार के मदद के खेने का काम करते थे लेकिन समय के परिवर्तन के साथ गांव की वह अल्हड़ता और बालपन छीन से गया और जब उन्होंने आज नदी के तट पर नाव देखा तो अपने उनदिनों को याद करते हुए नाव को खेने में लग गये।

टैग्स
इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

संबंधित खबरें