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आनंद मोहन की बढ़ सकती है मुश्किलें ? रिहाई के खिलाफ दायर याचिका पर SC सुनवाई को तैयार

DELHI : भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 307 और 147 के तहत सजायफ्ता बाहुबली आनंद मोहन जेल से रिहा कर दिए गए हैं। आनंद मोहन पर ये सभी धाराएं गोपालगंज के तत्कालीन जिला

आनंद मोहन की बढ़ सकती है मुश्किलें ? रिहाई के खिलाफ दायर याचिका पर  SC सुनवाई को तैयार
Tejpratap
Tejpratap
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DELHI  : भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 307 और 147 के तहत सजायफ्ता बाहुबली आनंद मोहन जेल से रिहा कर दिए गए हैं। आनंद मोहन पर ये सभी धाराएं गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के बाद लगाई गई थी। जिसके बाद  2007 में आनंद मोहन को निचली अदालत ने दोषी पाया था और सजा सुनाई थी। वहीं, इनकी रिहाई पर IAS अधिकारी जी कृष्णय्या की पत्नी उमा कृष्णैया ने  सुप्रीम कोर्ट में  याचिका दायर की थी। जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की तारीख तय कर दी है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को सुनवाई की तारीख तय किया है।


दरअसल, जी. कृष्णैया की पत्नी उमा ने सुप्रीम कोर्ट में आनंद मोहन की रिहाई की खिलाफ याचिका दायर कर दी है। उन्होंने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि उनके पति के हत्यारे को जेल से रिहाई  करने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया जाए। इस याचिका में यह कहा गया था कि, जब भी किसी को आजीवन कारावास की सजा होती है तो उसका मतलब यह  होता है कि अब वो पूरी जिंदगी जेल में ही रहेगा ना की 14 साल की सजा काटकर बाहर आ जाएगा। इसके बाद अब इस याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। इस ममाले में सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई की तारीख तय किया है।


बताया जा रहा है कि,  IAS अधिकारी जी कृष्णय्या की पत्नी उमा कृष्णैया की यचिका पर सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट के तैयार होने पर अब यह भी कहा जा रहा है कि, अगर शीर्ष अदालत सरकार के इस फैसले पर रोक लगाती है तो आनंद मोहन को वापस जेल भी जाना पड़ सकता है। 


आपको बताते चलें कि, मुजफ्फरपुर जिले में 1994 में हुए गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैय्या हत्याकांड में बाहुबली आनंद मोहन को 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। बाद में इसे उम्रकैद में बदल दिया गया। इसके बाद से आनंद मोहन जेल में बंद थे। पिछले महीने ही नीतीश सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किया और 'सरकारी सेवकों की हत्या के दोषी' वाले विशेष नियम को हटा दिया। फिर राज्य सरकार ने आनंद मोहन समेत 27 बंदियों की रिहाई का आदेश जारी किया और पूर्व सांसद जेल से बाहर आ गए।