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बिहारियों से एलर्जी रखने वाली शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे अब बिहार आते रहेंगे, नीतीश और तेजस्वी ने रेड कारपेट..

PATNA : शिवसेना के फ्यूचर सुप्रीमो और बाला साहब ठाकरे के पोते आदित्य ठाकरे आज पटना पहुंचे। आदित्य ठाकरे के बिहार दौरे के कार्यक्रम की जानकारी मंगलवार को ही सामने आई थी और आज अ

बिहारियों से एलर्जी रखने वाली शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे अब बिहार आते रहेंगे, नीतीश और तेजस्वी ने रेड कारपेट..
Editor
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PATNA : शिवसेना के फ्यूचर सुप्रीमो और बाला साहब ठाकरे के पोते आदित्य ठाकरे आज पटना पहुंचे। आदित्य ठाकरे के बिहार दौरे के कार्यक्रम की जानकारी मंगलवार को ही सामने आई थी और आज अचानक से आदित्य ठाकरे पटना पहुंचे तो सबसे पहले डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इसके बाद तेजस्वी खुद आदित्य ठाकरे को लेकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां आदित्य ठाकरे की मुलाकात नीतीश कुमार से करवाई। इस दौरान ठाकरे की मेजबानी में नीतीश और तेजस्वी दोनों जुटे रहे। बिहार में आदित्य ठाकरे का स्वागत देखकर ज्यादातर बिहारियों के मन में यह सवाल आया होगा कि यह उसी शिवसेना के नेता का स्वागत है, जो महाराष्ट्र में बिहारियों की पिटाई के लिए जानी जाती है। शिवसेना के एजेंडे में उत्तर भारतीयों का विरोध सबसे ऊपर रहा है। 


ठाकरे के लिए रेड कारपेट क्यों?


उत्तर भारतीयों और खास तौर पर बिहारियों के लिए शिवसेना के मन में जो नफरत रही है, इसे सभी लोग जानते हैं। इसके बावजूद आदित्य ठाकरे के पटना पहुंचने पर मुख्यमंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री तक के जिस तरह स्वागत में जुटे रहे, उसके बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर रेड कारपेट बिछाकर आदित्य ठाकरे का इतनी गर्मजोशी से स्वागत क्यों किया गया? सियासी जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव दोनों की नजरें 2024 के लोकसभा चुनाव पर हैं। खुद नीतीश कुमार के एजेंडे में बीजेपी को शिकस्त देना सबसे ऊपर है, इस लिहाज से अगर नीतीश बिहार में बीजेपी के खिलाफ गोलबंदी कर चुके हैं तो महाराष्ट्र में शिवसेना के बगैर यह काम संभव नहीं है। यही वजह है कि शिवसेना के साथ बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में नीतीश और तेजस्वी ज्यादा कंफर्टेबल नजर आए। एक दौर था जब लालू यादव शिवसेना को खूब खरी-खोटी सुनाते थे। नीतीश कुमार बिहारियों पर महाराष्ट्र में हुए हमले को लेकर शिवसेना के ऊपर भड़ास निकालते थे लेकिन आज उसी शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे का दोनों स्वागत करते नजर आए। इसे राजनीति नहीं तो और क्या कहेंगे?


ठाकरे का बिहार प्रेम


ऐसा नहीं है कि शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे को लेकर केवल नीतीश और तेजस्वी ने ही प्रेम दिखाया। आदित्य ठाकरे खुद बिहारियों के लिए अब पुरानी बात को दरकिनार करते नजर आए। आदित्य ठाकरे से बिहारियों के ऊपर हमले को लेकर सवाल भी हुआ जवाब आया.. यह सब कुछ बीजेपी वाले करवाते थे। आदित्य ठाकरे उत्तर भारतीयों और बिहारियों के ऊपर हमले की चर्चा भी नहीं करना चाहते तो यहां तक कह दिया कि अब आना–जाना लगा रहेगा। आदित्य ठाकरे ने यह बता दिया कि शिवसेना के मन में अब बिहारियों के लिए कोई नफरत नहीं है। अगर नफरत है तो सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के लिए। 


तेजस्वी और आदित्य हैं भविष्य


आदित्य ठाकरे के दौरे से भले ही बिहार की राजनीति गरमाई रही हो लेकिन एक अच्छी बात यह हुई कि तेजस्वी यादव के साथ ठाकरे की केमिस्ट्री देखते बनी। आदित्य और तेजस्वी दोनों युवा नेता है, दोनों भविष्य के लीडर साबित होंगे और ऐसे में अगर महाराष्ट्र और बिहार के संबंधों में तेजस्वी और आदित्य के जरिए मिठास आती है तो इससे अच्छी बात कुछ नहीं हो सकती। आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में उसी तरह प्रभावशाली रहेंगे जैसे तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में। कोई सरकार में रहे या विपक्ष में लेकिन बिहारियों को लेकर अगर शिवसेना के रुख में बदलाव दिख रहा है तो उन परिवारों के लिए एक शुभ संकेत है जो बिहार से दूर परदेश में अपनी रोटी कमाने के लिए रहते हैं।