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नवरात्र के दूसरे दिन घर पर ही करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

DESK : आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा होती है. मां दुर्गा का यह स्वरूप उस कन्या का है, जो देवों के देव महादेव को अपने पति के तौर पर प

FirstBihar
Anamika
3 मिनट

DESK : आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा होती है. मां दुर्गा का यह स्वरूप उस कन्या का है, जो देवों के देव महादेव को अपने पति के तौर पर प्राप्त करने के लिए कठोर तप करती है. कठोर तप के कारण ही माता का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा है. मां ब्रह्मचारिणी की पूर्ण आस्था के साथ पूजा करने पर सदैव विजय की प्राप्ति होती है.

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

मां ब्रह्मचारिणी सरल स्वभाव की हैं पर दुष्टों को सही मार्ग दिखाने वाली हैं. इनके दाहिने हाथ में जप की माला व बाएं हाथ में कमंडल होता है. साधक यदि शक्ति के इस स्वरूप की आराधना करते है तो उसमें शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य के भाव में वृद्धि होती है. जीवन के कठिन से कठिन संघर्ष में मन विचलित नहीं होता.

पूजा विधि

दुसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का आहवाहन करने के बाद मां को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पण करें. मां के पूजा में गुडहल के फूल का विशेष महत्त्व है. बाद में पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें. कहा जाता है कि मां पूजा करने वाले भक्त जीवन में सदा शांत चित्त और प्रसन्न रहते हैं. उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं सताता. 

मां के मंत्र

 ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी ।

सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते ।।

         या 

 ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

 पूजा समाप्त होने के बाद किसी भी मंत्र का 108 बार जाप करें 

 मां ब्रह्मचारिणी की कथा

मां ब्रह्मचारिणी ने नारदजी के सलाह से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था. इनके कठोर तप के कारण ही इनका नाम ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी पड़ा. तपस्या के प्रथम चरण में मां केवल फल-फूल खाती रहीं फिर बेल पत्र खा कर जीवन बिताया और बाद में निर्जल और निराहार रहकर कठोर तप किया. बारिश और धूप में हजारों वर्ष तक उन्होंने भगवान शिव की आराधना की. उनके तप से देवता, ऋषि, मुनि सभी अत्यंत प्रभावित हुए. मां ब्रह्मचारिणी के जैसा किसी ने तप नहीं किया था. इस कठिन तपस्या को देख कर भगवन शिव ने उनकी सभी मनोकामना पूर्ण कर दी.