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इंसानियत के लिए गया की महिलाओं ने रूढ़ियों को तोड़ा, लावारिस की मौत के बाद अर्थी को दिया कंधा, चिता को दी आग

DESK: गया के चेरकी गांव की महिलाओं ने संवेदनहीन हो चुके समाज को आइना दिखाया है. गांव की एक बेसहारा महिला की मौत के बाद जब मर्द घरों मे बैठ गये थे तो महिलायें चौखट लांघ कर बाहर आयीं. म

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DESK: गया के चेरकी गांव की महिलाओं ने संवेदनहीन हो चुके समाज को आइना दिखाया है. गांव की एक बेसहारा महिला की मौत के बाद जब मर्द घरों मे बैठ गये थे तो महिलायें चौखट लांघ कर बाहर आयीं. महिलाओं ने न सिर्फ अर्थी को कंधा दिया बल्कि चिता को आग भी दी. पूरे विधि विधान के साथ बेसहारा महिला के शव का अंतिम संस्कार किया गया. गया के चेरकी गांव का मामला गया के चेरकी गांव में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गयी. महिला का कोई निकट संबंधी नहीं था.लिहाजा अंतिम संस्कार करने कोई नहीं आगे आया. आस पास की लड़कियों को ये अमानवीयता बर्दाश्त नहीं हुई. पड़ोस की लड़कियों ने महिला का अंतिम संस्कार खुद करने की जिम्मा उठाया. पूरे विधि विधान के साथ चिता सजायी गयी. लडकियों ने शव को कंधा देकर श्मशान तक पहुंचाया और फिर चिता को आग भी दिया. उनके जज्बे को देखकर गांव के कुछ और लोग भी आगे आये और लड़कियों की मदद की. समाज को दिखाया आइना एक ओर जहां हमारे समाज में मान्यता है कि महिलाएं किसी भी मरे हुए इंसान की अर्थी को अपना कंधा नहीं दे सकती हैं. न ही किसी की चिता को आग दे सकती हैं. वहीं, इस रूढ़िवादी सोच के बाबजूद बिहार के गया जिला में कुछ महिलाओं ने मिलकर एक बुजुर्ग महिला के अर्थी को अपना कंधा दिया. महिलाओं ने लोगों की इस रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ कर समाज को आइना दिखाया. गया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
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