BEGUSARAI: हमारे समाज में कुछ काम सिर्फ पुरुषों के लिए समझे जाते हैं. जैसे पेशे के तौर पर गाड़ी चलाना भी एक ऐसा ही काम है, लेकिन बेगूसराय के आजाद नगर की शकुंतला इस धारणा को तोड़ते हुए आज ई-रिक्शा चला रही हैं.
इससे वे न सिर्फ परिवार चलाती हैं, बल्कि अपने बच्चों को बेहतर जीवन भी दे रही हैं. शकुंतला बताती है कि उसके पति दिव्यांग हैं और ज्यादा काम नहीं कर पाते हैं, जिस कारण बड़े होते बच्चों को बेहतर परवरिश के लिए उसने ई-रिक्शा चलाने की शुरुआत की.
शकुंतला बताती है कि शुरू में उसे इस काम के लिए बहुत प्रताड़ित किया. आसपास के लोगों ने उसकी पिटाई भी की, पर उसके हौसले कम नहीं हुए और वह ई-रिक्शा चलाकर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं. इस काम से उनकी बेगूराय के गांव-गांव तक पहचान है. आज शकुंतला अपने मेहनत की कमाई से अपना ई-रिक्शा चला रही है और इसके साथ ही अपने घर और बच्चों का काम भी खुद ही करती है.
बेगूसराय से जितेंद्र की रिपोर्ट
ई-रिक्शा चला कर परिवार चलाती है बेगूसराय की शकुंतला
BEGUSARAI: हमारे समाज में कुछ काम सिर्फ पुरुषों के लिए समझे जाते हैं. जैसे पेशे के तौर पर गाड़ी चलाना भी एक ऐसा ही काम है, लेकिन बेगूसराय के आजाद नगर की शकुंतला इस धारणा को तोड़ते हुए

