सम्राट का पत्ता साफ़, अब दिलीप जायसवाल संभालेंगे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी; एक साल पहले ही चौधरी को मिली थी जिम्मेदारी

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 25, 2024, 11:11:11 PM

सम्राट का पत्ता साफ़, अब दिलीप जायसवाल संभालेंगे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी; एक साल पहले ही चौधरी को मिली थी जिम्मेदारी

- फ़ोटो

PATNA : बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से सम्राट चौधरी को हटा दिया गया है। अब उनकी जगह इस कुर्सी पर दिलीप जायसवाल बैठेंगे। सम्राट चौधरी को महक एक ही साल में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटा दिया गया है। 


दरअसल, केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार बीजेपी में बड़ा उलटफेर हुआ है। बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी का पत्ता साफ करते हुए दिलीप जायसवाल को कमान सौंपी है।  प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद दिलीप जायसवाल ने केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुझे अभी बताया गया कि मैं बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना हूं । इसको लेकर मैं अपने आलाकमान और शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं कि मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है।


मालुम हो कि केंद्रीय नेतृत्व ने एक साल के भीतर ही प्रदेश अध्यक्ष के पद से सम्राट चौधरी को हटाने का फैसला ले लिया है। दिलीप जायसवाल अतिपिछड़ा वैश्य समाज से आते हैं और मोदी केबिनेट में सबसे पावरफुल नेता माने जाने वाले अमित शाह के भी करीबी नेता में एक गिने जाते हैं।


दिलीप पहले भी बिहार भाजपा में सांगठनिक तौर पर 20 वर्षों तक भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें बिहार सरकार में मंत्री भी बनाया है। इसके बाद अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी दी गई है। 


उधर, भाजपा सूत्रों की माने तो सम्राट चौधरी का पत्ता साफ होने की वजह लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक वोट शिफ्टिंग नहीं करवाया जाना बताया जा रहा है। पार्टी में अंदुरूनी तौर पर इस बात की चर्चा तेज है कि सम्राट अपने भी समाज को साथ नहीं ला सके। लिहाजा केंद्रीय नेतृत्व उनसे नाराज हो गई और अब उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया। 


इतना ही भाजपा की मातृ संगठन और विचार परिवार से जुड़े लोगों का भी यह कहना है कि चुनाव से पहले भी बैठकों का सम्राट को लेकर कुछ अच्छे फीडबैक निकल कर सामने नहीं आ रहे थे। जिसकी जानकारी उनको ( सम्राट चौधरी)दी गई थी और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की सलाह भी उन्हें दी गई थी। लेकिन आशा के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने की वजह से केंद्रीय नेतृत्व ने यह निर्णय किया है।