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क्या आपकी ये आदतें कर रही हैं आंखें कमजोर? विशेषज्ञ से जानिए रोशनी बचाने के आसान उपाय

मोबाइल, लैपटॉप और खराब जीवनशैली आपकी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकती है। जानिए विशेषज्ञों के अनुसार आंखों को स्वस्थ रखने, मायोपिया से बचाव और सही खानपान व स्क्रीन उपयोग के जरूरी उपाय।

बिहार न्यूज
ये है आंखों का सबसे बड़ा दुश्मन?
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DESK: स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की आंखों पर असर डालना शुरू कर दिया है। कम उम्र में चश्मा लगना, आंखों में सूखापन, जलन और लगातार सिरदर्द जैसी समस्याएं अब आम होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना और खराब खानपान आंखों की सेहत को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं।


बढ़ती उम्र ही नहीं, अब कम उम्र में भी कमजोर हो रही है नजर

पहले कमजोर नजर को बढ़ती उम्र का संकेत माना जाता था, लेकिन अब बच्चे और युवा भी मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), आंखों का सूखापन और आंखों की थकान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लगातार मोबाइल, लैपटॉप और किताबों पर नजर टिकाए रखना आंखों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।


ये है आंखों का सबसे बड़ा दुश्मन?

अक्सर माना जाता है कि स्क्रीन की रोशनी आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार असली समस्या स्क्रीन की रोशनी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बहुत करीब से एकटक देखना है। इसे 'नियर वर्क' कहा जाता है। लगातार पास की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की सिलियरी मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे मायोपिया का खतरा बढ़ जाता है।


धूप भी है आंखों की दोस्त

विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 1 से 2 घंटे प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है। धूप रेटिना में डोपामाइन नामक रसायन के स्राव को बढ़ाती है, जो आंखों की बनावट में होने वाले नुकसान को रोकने में मदद करता है और मायोपिया के खतरे को कम करता है।


डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर भी बढ़ाते हैं खतरा

जंक फूड, पर्याप्त नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों का अभाव केवल हृदय ही नहीं, आंखों के लिए भी नुकसानदायक है। मधुमेह से रेटिना की महीन रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। उच्च रक्तचाप इस खतरे को और बढ़ा देता है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते।


आंखों के लिए सही आहार भी है जरूरी

सिर्फ गाजर खाना ही आंखों की सेहत के लिए पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रेटिना की सुरक्षा के लिए ल्युटिन और ज़ेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स बेहद जरूरी हैं। ये पोषक तत्व पालक, चौलाई, ब्रोकोली और अंडे की जर्दी में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए संतुलित आहार में इन खाद्य पदार्थों को भी शामिल करना चाहिए।


इन गलतियों से बचें

केवल ब्लू-लाइट फिल्टर चश्मे पर निर्भर न रहें। ये डिजिटल आई स्ट्रेन से पूरी तरह सुरक्षा नहीं देते।

बिना डॉक्टर की सलाह के प्रिजर्वेटिव युक्त आई ड्रॉप्स का बार-बार इस्तेमाल न करें। इससे आंखों की प्राकृतिक आंसू बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

अंधेरे कमरे में मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचें। इससे आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

30 वर्ष की उम्र के बाद हर साल कम से कम एक बार आंखों की नियमित जांच अवश्य कराएं, चाहे कोई परेशानी महसूस न हो।


इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें—

आंखों में लगातार सूखापन या जलन।

चीजें दोहरी दिखाई देना।

आंखों के सामने अचानक तैरते हुए काले धब्बे या कण नजर आना।

तेज रोशनी की चमक दिखाई देना।

ऐसा सिरदर्द जो सुबह उठने या लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद बढ़ जाए।


विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में मधुमेह या उच्च रक्तचाप का इतिहास है, उन्हें किसी भी लक्षण का इंतजार किए बिना नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आंखों की रोशनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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