1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 28, 2026, 2:06:29 PM
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IT Raid 72 Hours : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की तीन दिन तक चली सघन कार्रवाई शनिवार को समाप्त हो गई। लगभग 72 घंटे तक चली इस छापेमारी के बाद विभागीय टीमें भारी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, नकदी और आभूषणों का ब्योरा लेकर लौटीं। इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है और सत्ता से लेकर विपक्ष तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
आयकर विभाग की टीमों ने विधायक के पैतृक गांव स्थित आवास, रसड़ा क्षेत्र के छितौनी में संचालित ‘होटल स्काई’, उनके प्लांट, कार्यालय और दो अन्य करीबियों के घरों को खंगाला। तलाशी के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) के सरकारी ठेकों से जुड़े अहम दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन की डायरियां और हस्तलिखित पर्चियां बरामद की गईं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने विधायक से जुड़ी कंपनियों ‘सीएस इंफ्राकंस्ट्रक्शन लिमिटेड’ और ‘छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन’ के पिछले सात वर्षों के टेंडर और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं।
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा गुप्त अलमारियों का मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दीवारों और छिपी जगहों पर बनाई गई इन अलमारियों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। शुरुआती आकलन में करीब नौ करोड़ रुपये से अधिक की रकम और करोड़ों के आभूषण मिलने की बात सामने आई है। नोटों की गिनती के लिए देर रात बैंकों से मशीनें और कर्मचारी बुलाए गए। कुछ नकदी को स्थानीय बैंक शाखाओं में जमा कराया गया, जबकि वाराणसी में विधायक से जुड़े छह बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि इस पूरी कार्रवाई की पृष्ठभूमि अगस्त 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से जुड़ी है। रिपोर्ट में विधायक की कंपनी ‘साईं राम एंटरप्राइजेज’ पर 33,604 घनमीटर गिट्टी के अवैध खनन का आरोप लगाया गया था, जिससे सरकार को करीब 60 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई। आयकर विभाग अब इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि क्या लीज सीमा से अधिक खनन कर अर्जित धन को अन्य व्यवसायों या बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया।
कार्रवाई का दायरा सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रहा। लखनऊ, प्रयागराज, कौशांबी, सोनभद्र और वाराणसी समेत सात जिलों में एक साथ छापेमारी की गई। जांच के दौरान मिले ‘कच्चे कागजात’ और डायरियों में दर्ज संदिग्ध लेनदेन से संकेत मिल रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली नाम भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है, जिन पर फर्मों में निवेश या सहयोग का संदेह है।
छापेमारी के दौरान विधायक की सेहत का भी विशेष ध्यान रखा गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और हाल ही में विदेश से इलाज कराकर लौटे हैं। वे लखनऊ स्थित आवास पर आइसोलेशन में थे। आयकर अधिकारियों ने मानवीय आधार पर उनके छोटे भाई और कंपनी निदेशक रमेश सिंह से पूछताछ की, साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों से भी जानकारी जुटाई।
उल्लेखनीय है कि उमाशंकर सिंह वर्ष 2012 से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। इससे पहले उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस जांच भी चल रही है। अब आयकर विभाग की इस कार्रवाई ने उनकी कानूनी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। विभाग जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा की गहन जांच कर रहा है, ताकि संभावित बेनामी संपत्तियों और वित्तीय नेटवर्क का पूरा खुलासा किया जा सके।