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मदरसा में दाखिला के नाम पर तस्करी: ओडिशा में बिहार के 59 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू

ओडिशा के कटक में आरपीएफ ने बिहार के अररिया से लाए गये 59 नाबालिग बच्चों को मानव तस्करी के शक में रेस्क्यू किया। बच्चों को मदरसे में दाखिले और रहने खाने की व्यवस्था किये जाने का लालच दिया गया था।

बिहार न्यूज
रेस्क्यू बच्चों की अररिया भेजी गई लिस्ट
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: ओडिशा के कटक रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मानव तस्करी की आशंका में बिहार के अररिया जिले के 59 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। ये बच्चे धौली एक्सप्रेस से प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर उतर रहे थे, तभी उनकी गतिविधियों पर संदेह होने पर आरपीएफ ने उन्हें रोक लिया।


जांच के दौरान पता चला कि सभी बच्चे नाबालिग हैं और उनके साथ कोई अभिभावक मौजूद नहीं था। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्हें अररिया जिले के गरीब गांवों से लाया गया था। उन्हें ओडिशा के एक मदरसे में दाखिला दिलाने के नाम पर मुफ्त पढ़ाई, भोजन और रहने का लालच दिया गया था।


बच्चों ने यह भी बताया कि वे अररिया से कटिहार, फिर हावड़ा होते हुए कटक पहुंचे थे। संदेह पुख्ता होने पर आरपीएफ ने तुरंत चाइल्डलाइन को सूचना दी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। सभी बच्चों को कटक की चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) को सौंप दिया गया।


सीडब्ल्यूसी ने बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास की जिम्मेदारी संभाल ली है। अररिया चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा (उर्फ रिंकू वर्मा) के अनुसार, ओडिशा प्रशासन द्वारा बच्चों के भोजन, रहने और स्वास्थ्य की उचित व्यवस्था की गई है तथा उनका मेडिकल चेकअप भी कराया गया ।


रेस्क्यू किए गए बच्चों की सूची अररिया भेज दी गई है। वहां जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की टीमें बच्चों के पते का सत्यापन कर रही हैं। अभिभावकों को सूचित किया जा रहा है और उनसे संपर्क के लिए विशेष टीम गठित की गई है।


इस तरह के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं, जहां गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा के नाम पर दूसरे राज्यों में ले जाया जाता है। आरपीएफ और बाल कल्याण संस्थाओं की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से इन बच्चों को संभावित खतरे से बचा लिया गया। अब जांच जारी है और बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज़ी से की जा रही है।


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