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India Pakistan: पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को भारत ने बनाया था निशाना? सामने आई सीजफायर की असली कहानी

India Pakistan: नूर खान एयरबेस पर भारत के हमले ने पाकिस्तान के परमाणु कमांड को हिलाया। क्या यह था सीजफायर का असली कारण? जानें...

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सैटेलाईट इमेज नूर खान एयरबेस
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

India Pakistan: भारत द्वारा पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर हमला और इसके बाद हुए सीजफायर को लेकर अब नई जानकारी सामने आ रही। जैसा कि आप सब जानते हैं 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों की आतंकी हमले में मौत के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत ने इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और 10 मई को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर सटीक मिसाइल हमला किया। इस हमले ने न केवल पाकिस्तान की सैन्य ताकत को झकझोरा, बल्कि उसके परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए। उस एयरबेस पर हमला ही सीजफायर की असली वजह बना।


नूर खान एयरबेस, रावलपिंडी में इस्लामाबाद से सिर्फ 10 किमी दूर, पाकिस्तान वायुसेना का एक प्रमुख केंद्र है। यह स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिविजन और नेशनल कमांड अथॉरिटी के मुख्यालय के करीब है, जो पाकिस्तान के करीब 170 परमाणु हथियारों का प्रबंधन करता है। 10 मई को भारत ने ब्रह्मोस, हैमर और स्कैल्प मिसाइलों से इस एयरबेस पर हमला किया, जिससे इसका बुनियादी ढांचा तबाह हो गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम इस हमले को रोकने में नाकाम रहे। यह हमला भारत का एक रणनीतिक संदेश था कि वह पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील ठिकानों, यहाँ तक कि परमाणु कमांड को भी निशाना बना सकता है।


इस हमले ने पाकिस्तान में दहशत मचा दी, क्योंकि नूर खान एयरबेस के पास ही उसका परमाणु कमांड सेंटर है। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि अगर भारत की मिसाइलें कुछ किलोमीटर और सटीक निशाना लगातीं, तो परमाणु हथियारों के जखीरे में विस्फोट या रेडिएशन का खतरा पैदा हो सकता था। हालांकि, ये दावे सत्यापित नहीं हुए हैं। फिर भी, इस हमले ने पाकिस्तानी नेतृत्व को हिलाकर रख दिया। कुछ खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुरंत NCA की बैठक बुलाने की कोशिश की, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया गया। इस हमले ने पाकिस्तान को यह एहसास दिलाया कि भारत की सैन्य ताकत अब उसके सबसे सुरक्षित ठिकानों तक भी पहुंच सकती है।


बताते चलें कि सीजफायर की घोषणा 10 मई की शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से हुई, लेकिन इसके पीछे नूर खान हमले की भूमिका अहम थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इस हमले ने अमेरिका को भी हरकत में ला दिया, क्योंकि परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया था। पाकिस्तान ने तुरंत अमेरिका से संपर्क किया, और आसिम मुनीर व अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बातचीत ने सीजफायर की राह खोली। ट्रंप ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया, लेकिन एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगर तुरंत हस्तक्षेप न होता, तो हालात पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ सकते थे।


भारत ने भी इस सीजफायर को स्वीकार किया, लेकिन विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि पाकिस्तान ने समझौते का उल्लंघन किया, जिसका जवाब भारतीय सेना दे रही है। नूर खान एयरबेस पर भारत का हमला न केवल एक सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक कड़ी चेतावनी भी थी कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अब कोई भी समझौता नहीं करेगा।