1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 01, 2026, 1:39:37 PM
- फ़ोटो
NCERT Book Controversy: बच्चों के स्कूल बैग में रखी NCERT की किताबें अब फिर विवादों में फंसी हैं। इस बार मामला कक्षा 8 की ‘सोशल एंड पॉलिटिकल लाइफ III’ किताब से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक नई याचिका दाखिल की गई है, जिसमें याचिकाकर्ता ने किताब में न्यायपालिका की छवि को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी कक्षा 8 की एक अन्य किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” वाले अध्याय को लेकर विवाद हो चुका है।
क्या है मामला?
याचिका डॉ. पंकज पुष्कर ने दाखिल की है, जो स्वयं NCERT की पाठ्यपुस्तक विकास प्रक्रिया में पहले शामिल रह चुके हैं। उनका कहना है कि किताब के पेज नंबर 62 में न्यायपालिका के बारे में जो विवरण है, वह संदर्भ से हटकर और एकतरफा प्रस्तुत किया गया है। किताब में लिखा गया है कि “हालिया फैसले झुग्गीवासियों को शहर में अतिक्रमणकर्ता के रूप में देखते हैं।”
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह के कथन छात्रों के लिए भ्रामक संदेश भेज सकते हैं और न्यायपालिका की छवि को गलत तरीके से पेश करते हैं। खासकर कक्षा 8 जैसे संवेदनशील स्तर के छात्रों के लिए ऐसी प्रस्तुति न्यायिक संस्थानों को असंवेदनशील या प्रतिगामी दिखा सकती है और जनता के न्यायिक विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
क्यों उठे सवाल?
याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि किताब में यह नहीं बताया गया कि अदालतें प्रतिस्पर्धी संवैधानिक अधिकारों, वैधानिक प्रावधानों और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति न्यायपालिका की भूमिका को संतुलित और न्यायपूर्ण तरीके से नहीं दिखाती।
इससे पहले भी मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कक्षा 8 की एक नई सामाजिक विज्ञान की किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” वाले अध्याय पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग और NCERT निदेशक को अवमानना नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी थी कि अगर पाठ्यक्रम में जानबूझकर न्यायपालिका को प्रभावित करने का प्रयास पाया गया, तो यह अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
याचिकाकर्ता का दावा और उद्देश्य
डॉ. पुष्कर ने बताया कि वे स्वयं NCERT की पुस्तकों के विकास, सह-लेखन और अनुवाद में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अदालत में प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि “प्रतिभागी-गवाह” के रूप में उपस्थित होना चाहते हैं, ताकि शैक्षणिक सामग्री में संवैधानिक मूल्यों और न्यायपालिका की भूमिका की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2007 से लगातार इस पुस्तक का वितरण हो रहा है, और अब इसे संवैधानिक दृष्टि से जांचने की आवश्यकता है।
अगले कदम
मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान कार्यवाही के तहत या उसके क्रम में होने की संभावना है। याचिकाकर्ता का उद्देश्य साफ है NCERT की पाठ्यपुस्तकों में छात्रों को सटीक, संतुलित और संवैधानिक रूप से जिम्मेदार जानकारी दी जाए।