DESK: देशभर में एमडीआर का विरोध हो रहा है। इसके नियमों को लेकर भी लोगों में बहुत कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। अब तो मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने तो यहां तक कह दिया है कि 2000 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल-डीजल-सीएनजी की खरीद पर यूपीआई से पेमेंट नहीं ली जाएगी।
MDR वापस लेने की मांग
जबकि सरकार का कहना है कि एक रुपया का बोझ जनता पर नहीं डाला जाएगा। सिर्फ 2000 रुपये से ज्यादा पर बड़े मर्चेंट को 0.40 फीसदी MDR लगेगा। 3000 रुपये के UPI पर मर्चेंट को 12 रुपये का MDR देना होगा। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार MDR वापस नहीं लेती है, तो 16 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपये से ज्यादा का UPI पेमेंट नहीं लिया जाएगा। कैश दीजिए और पेट्रोल लीजिए। ऐसा निर्णय इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि नई व्यवस्था में एक पेट्रोल पंप को हर माह करीब 18000 रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। पहले से ही मार्जिन कम है, इसलिए अतिरिक्त बोझ सहना पड़ेगा जो पेट्रोल पंप वालों के लिए बड़ी समस्या के रूप में सामने आएगी।
15 अक्टूबर से लागू हो जाएगी MDR फीस
बता दें, कारोबारी को किए जाने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की MDR फीस 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगी। इस MDR फीस का पेमेंट कस्टमर नहीं बल्कि कारोबारी करेंगे। 2000 रुपये से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल या CNG की खरीद पर 5 रुपये का फिक्स MDR लगेगा। इसलिए कारोबारी UPI से भुगतान स्वीकार करने पर MDR फीस वसूले जाने के खिलाफ हो गए हैं। यह भी बता दें कि बड़े कारोबारी को राहत देने के लिए 75 हजार या उससे अधिक की पेमेंट्स पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। चाहे लेन-देन 1 लाख रुपये का हो या 5 लाख रुपये का MDR चार्ज 300 रुपये ही लगेगा, यह ज्यादा नहीं हो सकता है।
छोटे दुकानदारों को राहत
फल-सब्जी, चाय, किराना, जूस, पान दुकान, दूध, वेंडर्स सहित छोटे दुकानदार और ऑटो वाले बड़े पैमाने पर QR कोड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे छोटे कारोबारियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। UPI QR कोड के जरिए महीने की कुल डिजिटल भुगतान 1 लाख रुपये तक ये कर सकते हैं, इन्हें P2PM श्रेणी में रखा गया है। इनके लिए सभी ट्रांजेक्शन पर MDR पूरी तरह शून्य (0%) रहेगा, चाहे ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से ऊपर का ही क्यों न हो। देश में 96 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांजेक्शन दो हजार रुपये या उससे कम के होते हैं। इसलिए 95% से अधिक छोटे और मध्यम व्यापारी इस MDR चार्ज के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे। सरकार का यह भी कहना है कि एक रुपया का बोझ जनता पर नहीं डाला जाएगा। सिर्फ 2000 रुपये से ज्यादा पर बड़े मर्चेंट को 0.40 फीसदी MDR लगेगा। 3000 रुपये के UPI पर मर्चेंट को 12 रुपये का MDR देना होगा।





